अपार्टमेंट मालिकों से परामर्श के बाद ही विधेयक लाएगी सरकार : शिवकुमार

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अपार्टमेंट मालिकों से परामर्श के बाद ही विधेयक लाएगी सरकार : शिवकुमार

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  • Publish Date - July 15, 2026 / 02:59 PM IST,
    Updated On - July 15, 2026 / 02:59 PM IST

बेंगलुरु, 15 जुलाई (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को अपार्टमेंट मालिकों को आश्वासन दिया कि सरकार सभी हितधारकों से परामर्श के बाद उनके स्वामित्व अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक कानून बनाएगी।

शिवकुमार ने कहा कि प्रस्तावित कर्नाटक अपार्टमेंट (स्वामित्व एवं प्रबंधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा में पेश करने से पहले इस पर व्यापक चर्चा की जाएगी।

बेंगलुरु में अपार्टमेंट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए शिवकुमार ने कहा कि सरकार बिल्डर, संपत्ति दस्तावेजों और अपार्टमेंट प्रबंधन से जुड़े लंबित मुद्दों का भी समाधान करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि घर खरीदने वालों के हित सुरक्षित रहें।

उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मामले में पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। जब आपको संपत्ति दी जा रही है तो उस पर आपका अधिकार होना चाहिए। आप ही उसके मालिक हैं।’’

इसके साथ ही उन्होंने अपार्टमेंट मालिकों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा को और मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता रेखांकित की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस कानून को जल्दबाजी में नहीं लाएगी और अंतिम रूप देने से पहले अपार्टमेंट एसोसिएशन, बिल्डर, विधि विशेषज्ञों तथा राजनीतिक दलों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा सत्र से पहले हमारे पास समय है। विधेयक पहले मंत्रिमंडल के पास जाएगा और उसके बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। मैं इसे जल्दबाजी में विधानसभा से पारित नहीं कराना चाहता। मैं सभी हितधारकों से चर्चा करना चाहता हूं और जहां भी अच्छे सुझाव मिलेंगे, उन्हें शामिल किया जाएगा।’’

शिवकुमार ने कहा कि अपार्टमेंट मालिकों ने जीवनभर की कमाई से अपना घर खरीदा है और उन्हें पूर्ण कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘आपकी मेहनत की कमाई से खरीदी गई संपत्ति को पूरा कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए। इसका किसी भी तरह दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।’’

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जो बिल्डर खरीदारों को संपत्ति के मूल दस्तावेज नहीं सौंपेंगे, उन्हें चर्चा के लिए बुलाया जाएगा। उन्होंने बैंकों में संपत्ति गिरवी रखने के बाद भी दस्तावेज अपने पास रखने की प्रवृत्ति के खिलाफ चेतावनी दी।

शिवकुमार ने कहा कि सरकार की प्रस्तावित ‘भूमि गारंटी’, जिसे उन्होंने सरकार की छठी गारंटी बताया, के तहत संपत्ति मालिकों को बिना रिश्वत दिए ‘खाता’ प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 40 लाख संपत्तियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है और 26 लाख ‘खाता’ जारी किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने अपार्टमेंट एसोसिएशन से सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) का समुचित रखरखाव करने और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों के समाधान में सहयोग करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार पेयजल आपूर्ति और शहरी बुनियादी ढांचे में लगातार सुधार करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि शहरी विकास मंत्री के रूप में उनके पिछले कार्यकाल के दौरान बेंगलुरु की आबादी लगभग 70 लाख थी, जो अब बढ़कर करीब 1.4 करोड़ हो गई है। उन्होंने कहा कि वहीं, लगभग 1.35 करोड़ वाहन उसी सड़क नेटवर्क का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए बुनियादी ढांचे का विस्तार चरणबद्ध तरीके से ही संभव है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने बेंगलुरु से जुड़े विभिन्न विभागों के माध्यम से लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू की हैं तथा सड़कों के सुधार और गड्ढों की मरम्मत के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

शिवकुमार ने कहा कि सरकार छोटी-छोटी आवासीय कॉलोनियों के बजाय सुनियोजित बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने की अपनी योजना पर कायम है। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे शहरों की तुलना में बेंगलुरु में आवास अब भी काफी सस्ता है, इसलिए यह शहर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा सपना है कि बेंगलुरु आपके दिल में बसे और वास्तव में भारत का भी दिल बने।’’

इससे पहले बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि यह परामर्श बैठक मुख्य रूप से प्रस्तावित विधेयक पर जनता की राय जानने के लिए बुलाई गई है और प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपनी टिप्पणियां विधेयक तक ही सीमित रखें।

बायरे गौड़ा ने कहा कि प्रस्तावित कानून की प्रमुख विशेषताएं ऑनलाइन अपलोड की जाएंगी और हितधारक एक निर्धारित ईमेल पते के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकेंगे। उन्होंने कहा कि विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले विधि क्षेत्र के संगठनों तथा कानून निर्माण से जुड़े अन्य संस्थानों से भी परामर्श किया जाएगा।

उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों को लेकर उठी चिंताओं का भी जवाब दिया। इन नियमों के तहत बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों, जिनमें पात्र अपार्टमेंट परिसर भी शामिल हैं, को पंजीकृत कचरा प्रसंस्करण एजेंसियों के साथ समझौता करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘यह उच्चतम न्यायालय का आदेश है। आप चाहें तो इसकी पुष्टि कर सकते हैं।’’

कचरा संग्रहण शुल्क को लेकर उठी चिंताओं पर उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल अधिकतम सीमा तय की है।

भाषा अमित शफीक

शफीक