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अहमदाबाद, 10 जुलाई (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया है कि गुजरात के कच्छ जिले में ‘जंपस्टार्ट’ नाम की एक पहल के तहत एक नयी संरक्षण तकनीक से पैदा हुए ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के दूसरे चूजे ने जिंदा रहने के लिए जरूरी 40 दिन की अहम अवधि को सफलतापूर्वक पार कर लिया है।
‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ को स्थानीय भाषा में ‘सोनचिरैया’ या ‘गोडावण’ कहते हैं जो गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी का लुप्तप्राय पक्षी है। इसकी संख्या अब बेहद कम रह गई है। यह पक्षी गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मिलता है।
मंत्री ने इस घटनाक्रम को ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की प्रजाति को बचाने की कोशिशों की दिशा में एक बड़ी सफलता बताया।
यादव ने कोयंबटूर में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की स्थायी समिति की 91वीं बैठक के दौरान ‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की प्रगति की समीक्षा करने के बाद बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
मंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह जानकर खुशी हुई कि गुजरात के नलिया (कच्छ जिले) में ‘जंपस्टार्ट’ की दूसरी कोशिश सफल रही है और 21 मई, 2026 को पैदा हुआ चूजा लगभग 40 दिनों तक जीवित रहने के अहम पड़ाव को पार कर चुका है।’’
यह सफलता उस घटना के लगभग तीन महीने बाद मिली है, जब इसी संरक्षण तकनीक से गुजरात में पैदा हुआ ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ का पहला चूजा अप्रैल में लापता हो गया था। वन अधिकारियों को आशंका है कि वह जंगली शिकारियों का शिकार बन गया।
यह परियोजना इसलिए शुरू की गई थी क्योंकि कच्छ के घास के मैदानों में इस प्रजाति की केवल तीन मादा पक्षियों के ही बचे होने का अनुमान है जिससे जंगल में इनके प्राकृतिक रूप से प्रजनन की संभावना लगभग खत्म हो गई है।
यादव के अनुसार, राजस्थान में भी संरक्षित प्रजनन कार्यक्रम ने काफी प्रगति की है। सैम और रामदेवरा के संरक्षण केंद्रों में पैदा हुए चूजों की कुल संख्या 98 तक पहुंच गई है।
भाषा सुरभि सिम्मी
सिम्मी