नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) नेपाल के पूर्व वन और पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागाईं ने उनके देश में आई विनाशकारी बाढ़ से पहले नेपाल और चीन के बीच समय पर जानकारी साझा नहीं किये जाने को ‘चिंताजनक’ बताया और कहा कि आपदा का पैमाना इतना बड़ा है कि मरने वालों की संख्या ‘अकल्पनीय’ रूप से बढ़ सकती है।
बुधवार सुबह तिब्बत में हिमनद टूटने से चीन और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में अचानक भीषण बाढ़ आ गई। अकेले नेपाल में 270 लोगों की मौत की खबर है, जबकि तिब्बत समेत प्रभावित क्षेत्र में मरने वालों की संख्या कुल संख्या 500 से ज़्यादा बताई जा रही है। करीब 300 भारतीय पर्यटकों समेत हज़ारों लोग लापता भी हैं।
पिछली सरकार में बुनियादी ढांचा का काम भी संभाल चुके चौलागाईं ने बृहस्पतिवार को कहा कि नेपाल ने 2025 में हिमनद टूटने की ऐसी ही लेकिन छोटे पैमाने की घटना का सामना किया था तथा तब दोनों देशों के बीच समयपूर्व चेतावनी साझा करने की जरूरत महसूस की गयी थी।
उन्होंने कहा, ‘‘यह स्थिति काफी चिंताजनक हो गई है क्योंकि यह सुबह-सुबह की बात थी। हमने देखा है कि दोनों देशों के बीच समय पर जानकारी के आदान-प्रदान में कुछ कमी है।’’
उन्होंने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि नेपाल एवं चीन के अधिकारी अब और तेज़ी से जानकारी साझा करने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि उन्होंने सुझाव दिया कि तैयारी की कमी ने दोनों पक्षों को प्रभावित किया होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘लगता है कि कल मौसम विभाग और चीनी अधिकारियों को यह बात समझ में आ गई तथा अब से वे समय पर जानकारी साझा करने पर सहमत हो गए हैं।’’
चौलागाईं ने कहा,‘‘चीन की तरफ से… जानकारी साझा करने में कुछ कमी रही है।’’
उन्होंने यह भी कहा कि चीनी पक्ष को भी भारी नुकसान हुआ है और ‘‘शायद वे भी पूरी तरह तैयार नहीं थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वरना, उन्होंने जानकारी दी होती, क्योंकि सीमा पर पारगमन मार्गों और पास के निचले इलाकों पर भी बुरा असर पड़ा है।’’
आपदा की वजह के बारे में चौलागाईं ने कहा कि अब यह साफ हो गया है कि बाढ़ भूकंप की वजह से नहीं आई , जैसा कि पहले बताया गया था, बल्कि बर्फ और ज़मीन खिसकने से नदी का रास्ता रुक गया तथा बाद में पानी का बहाव अचानक तेजी से बढ़ गया ।
उन्होंने कहा कि भूस्खलन की असल वजह को लेकर अभी साफ़ तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता, हालांकि जलवायु परिवर्तन और बढ़ता तापमान इसके संभावित कारण हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अब तक हमें सिर्फ आम जानकारी ही मिली है, जैसे कि जलवायु परिवर्तन, तापमान का बढ़ना और हिमनद का पिघलना।’’
चौलागाईं ने कहा कि असल में क्या हुआ, यह समझने के लिए नेपाल को तिब्बत की तरफ़ से जानकारी और उपग्रह तस्वीरों की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति और साफ़ हो जाएगी।’’
उन्होंने यह भी कहा कि लापता लोगों (जिनमें भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं) की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि इस इलाके में घूमने वाले कई यात्री शायद सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज न हों।
उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाका न सिर्फ नेपाल-चीन सीमापार मार्ग है, बल्कि तीर्थयात्रा का रास्ता भी है, जहां से लोग कैलाश मानसरोवर और दूसरे तीर्थ स्थलों की यात्रा करते हैं।
चौलागाईं ने कहा,‘‘भारतीय सीमा से बहुत से लोग आते-जाते हैं। वे उस जगह पर भी जाते हैं।’’
उन्होंने यह भी बताया कि कई लोग ट्रेकर और घरेलू तीर्थयात्री के तौर पर बिना किसी औपचारिक रिकॉर्ड के यात्रा करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे ऐसा लगता है कि मरने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा बढ़ सकती है।’’
भारत के साथ तालमेल के बारे में पूर्व मंत्री ने कहा कि नयी दिल्ली पहला पड़ोसी देश था जिसने जल्द प्रतिक्रिया दी; भारतीय दूतावास ने तालमेल बिठाने और संयुक्त रूप से खोज अभियान चलाने की पहल की।
भाषा
राजकुमार माधव
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