अहमदाबाद, नौ फरवरी (भाषा) अहमदाबाद में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे पर आधारित गुजराती नाटक का मंचन सोमवार को रद्द कर दिया गया।
यह फैसला युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद किया गया, जिन्होंने आरोप लगाया कि यह नाटक गोडसे का “महिमामंडन” करने का प्रयास है।
आयोजकों के अनुसार, ‘हू नाथूराम’ (मैं नाथूराम) नामक इस नाटक का सोमवार रात नौ बजे अहमदाबाद के पंडित दीनदयाल सभागार में मंचन किया जाना था।
नाटक के आयोजक जयेश ओझा ने कहा, “गुजरात यात्रा के दौरान चार, पांच और छह फरवरी को सूरत, वडोदरा और भावनगर में बिना किसी विवाद के नाटक का मंचन हुआ। हालांकि, सात फरवरी को राजकोट में प्रस्तावित मंचन के दौरान यूवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सेट पर तोड़फोड़ की, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।”
उन्होंने कहा कि इसके बाद आठ फरवरी को जामनगर और नौ फरवरी को अहमदाबाद के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए।
कांग्रेस की गुजरात इकाई के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि यह नाटक गोडसे की करतूत (महात्मा गांधी की हत्या) को सही ठहराने का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का प्रयास है।
उन्होंने कहा, “गांधीजी के गुजरात में जब तक कांग्रेस और गांधीजी की विचारधारा को मानने वाले लोग हैं, तब तक यहां ऐसे नाटकों का मंचन नहीं होने दिया जाएगा।”
चावड़ा की बात का समर्थन करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पार्थिवराजसिंह काठवाडिया ने कहा कि पार्टी इस तरह के नाटकों के जरिये गोडसे का महिमामंडन नहीं होने देगी।
उन्होंने कहा, “गुजरात की जनता ने गोडसे की विचारधारा को नकार दिया है। राजकोट और जामनगर के बाद अब अहमदाबाद में भी यह नाटक रद्द कर दिया गया है। गोडसे गुजरात और भारत के लिए हमेशा खलनायक रहा है, जबकि गांधीजी भारत और दुनिया के नायक थे, हैं और रहेंगे।”
नाटक की निर्माता सेजल पेंटर ने सेट पर तोड़फोड़ की निंदा करते हुए कहा कि यदि विरोध करने वाले लोग शांतिपूर्वक अपनी आपत्तियां जताते, तो वह नाटक का विषय स्पष्ट कर सकती थीं।
उन्होंने कहा, “जो लोग खुद को गांधीजी का अनुयायी बताते हैं, उन्हें नाटक के सेट पर तोड़फोड़ कर हिंसा का सहारा नहीं लेना चाहिए था। हमने नाथूराम को नायक के रूप में प्रस्तुत नहीं किया है। नाटक में नाथूराम का किरदार कहता है—‘अगर मैंने गांधीजी की हत्या की है, तो मुझे भी मरना चाहिए।”
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश