उच्च न्यायालय को केंद्र के आश्वासन के बाद जिमखाना क्लब सदस्यों ने ली राहत की सांस

Ads

उच्च न्यायालय को केंद्र के आश्वासन के बाद जिमखाना क्लब सदस्यों ने ली राहत की सांस

  •  
  • Publish Date - May 26, 2026 / 04:37 PM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 04:37 PM IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों ने मंगलवार को उस वक्त राहत की सांस ली, जब केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि पांच जून को क्लब परिसर का जबरन कब्जा नहीं लिया जाएगा। इससे 113 साल पुरानी संस्था पर निर्भर पूर्व सैनिकों और कर्मचारियों की आशंकाएं कम हो गईं।

यह आश्वासन उस वक्त आया, जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि लुटियंस दिल्ली स्थित क्लब के खिलाफ कोई भी बेदखली की कार्यवाही कानून के अनुसार ही की जाएगी और कब्जेदारों को उचित नोटिस देने के बाद की जाएगी।

न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन के समक्ष दलीलें पेश किए जाने के बाद, क्लब के कई सदस्यों ने इस घटनाक्रम को एक बड़ी राहत बताया और कहा कि केंद्र के 22 मई के उस आदेश के बाद व्यापक चिंता का माहौल था, जिसमें क्लब को कुछ ही दिनों के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया था।

क्लब के सदस्य शिवम भाटिया ने कहा कि अदालती कार्यवाही से यह स्पष्ट हो गया है कि परिसर से अचानक बेदखली या जबरन प्रवेश नहीं होगा।

भाटिया ने कहा, ‘‘सॉलिसिटर जनरल ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना है और क्लब में जबरन प्रवेश या बेदखली नहीं होगी। अब जो भी होगा, वह कानूनी रूप से और उपयुक्त नोटिस के बाद होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह 113 साल पुरानी संस्था है। इसमें 90 वर्ष से अधिक आयु के सदस्य, पूर्व सैनिक और लगभग 600 कर्मचारी हैं जिनकी आजीविका क्लब पर निर्भर है। इस तरह के 13 दिन के नोटिस से सदस्यों और कर्मचारियों में भारी चिंता पैदा हो गई है।’’

सरकार के नोटिस में उल्लेखित पांच जून की समय सीमा के बारे में पूछे जाने पर भाटिया ने कहा, ‘‘फिलहाल पांच जून को कोई बेदखली या निकासी नहीं हो रही है।’’

एक अन्य सदस्य, सेवानिवृत्त मेजर अतुल देव ने कहा कि सदस्यों के पास अब अपना कानूनी मामला ठीक से तैयार करने का समय है।

उन्होंने कहा, ‘‘कई सदस्यों में अनिश्चितता और भय था कि परिसर को तुरंत खाली करना पड़ सकता है। आज की कार्यवाही ने सभी को कुछ राहत दी और विश्वास दिलाया कि अब मामला कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगा।’’

क्लब के सदस्य विक्रम भल्ला ने कहा कि केंद्र द्वारा अदालत के समक्ष अपना रुख स्पष्ट करने के बाद सदस्यों को राहत मिली है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस बात की राहत है कि कोई अचानक कार्रवाई नहीं होगी और सभी हितधारकों को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने का निष्पक्ष अवसर मिलेगा।’’

एक अन्य सदस्य, सुरेश गोयल ने कहा कि अदालती कार्यवाही से अस्थायी राहत मिली है, लेकिन क्लब के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सदस्य ने कहा, ‘‘तत्काल चिंता यह थी कि सदस्यों और कर्मचारियों को कुछ ही दिनों में अचानक बेदखल किया जा सकता है। आज की सुनवाई के बाद, यह आश्वासन मिला है कि कोई भी अचानक कार्रवाई नहीं की जाएगी और अब इस मामले का निपटारा उचित कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाएगा।’’

सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र का नोटिस क्लब को दिये गए स्थायी पट्टे को समाप्त करने और जमीन पर दोबारा कब्जा हासिल करने के उद्देश्य से जारी किया गया था।

अदालत ने केंद्र और क्लब प्रबंधन को समन जारी किया तथा सदस्यों और कर्मचारियों द्वारा बेदखली नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर उनके लिखित जवाब मांगे।

केंद्र ने इससे पहले क्लब को 27.3 एकड़ जमीन सौंपने के लिए कहा था और यह तर्क दिया था कि रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने तथा अन्य सार्वजनिक सुरक्षा उद्देश्यों के लिए इसकी आवश्यकता है।

भाषा सुभाष माधव

माधव