चंडीगढ़, 27 अप्रैल (भाषा) हरियाणा विधानसभा ने सोमवार को हरियाणा लिपिक (भर्ती और सेवा शर्तें) विधेयक 2026 पारित कर दिया और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इससे ग्रुप डी (चतुर्थ श्रेणी) कर्मचारियों के लिए पदोन्नति प्रक्रिया सरल, तेज और अधिक पारदर्शी हो जाएगी।
यह विधेयक सदन में सैनी द्वारा पेश किया गया था और विधानसभा के विशेष सत्र का बहिष्कार करने वाले विपक्षी कांग्रेस सदस्यों की अनुपस्थिति में पारित किया गया।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि 2018 में हरियाणा ग्रुप डी कर्मचारी (भर्ती और सेवा शर्तें) अधिनियम 2018 के माध्यम से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए एक समान कैडर प्रणाली लागू की गई थी, जिससे फील्ड कैडर में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए समान पदोन्नति के अवसर उपलब्ध हुए।
सैनी ने बताया कि पहले पदों की सीमित संख्या के कारण केवल कुछ ही कर्मचारियों को पदोन्नति मिल पाती थी।
इसके अतिरिक्त विभागों के भीतर पदोन्नति के अवसर सीमित थे, जिससे कर्मचारियों की करियर वृद्धि बाधित होती थी। नए विधेयक के तहत ‘ग्रुप डी’ कर्मचारियों के लिए लिपिकीय पदों पर पदोन्नति का कोटा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे अधिक संख्या में कर्मचारियों को पदोन्नति मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि पहले कई विभागों में कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए 10 से 15 साल तक इंतजार करना पड़ता था। समान कैडर प्रणाली लागू होने, पदोन्नति कोटा बढ़ने और सेवा अवधि की आवश्यकता कम होने से अब पदोन्नति प्रक्रिया तेज और समयबद्ध होगी, जिससे अधिक से अधिक कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष सदन में मौजूद होता तो राज्य के कर्मचारियों के हित में व्यापक सहमति प्राप्त की जा सकती थी।
कांग्रेस ने सोमवार को हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र का यह कहते हुए ‘बहिष्कार’ किया कि सत्तारूढ़ भाजपा एक प्रस्ताव के माध्यम से लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन की निंदा करना चाहती थी। पार्टी ने भाजपा पर निहित राजनीतिक स्वार्थों और दुष्प्रचार के लिए इस मंच का उपयोग करने का आरोप लगाया।
विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों से कहा कि हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल ने एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र का बहिष्कार करने का फैसला किया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार जिस मामले पर चर्चा करना चाहती थी, वह विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
भाषा
शुभम वैभव
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