‘सोशल डिस्टेंसिंग’ शब्द पर आपत्ति वाली याचिका खारिज, HC ने याचिकाकर्ता पर 10 हजार का जुर्माना भी ठोका

'सोशल डिस्टेंसिंग' शब्द पर आपत्ति वाली याचिका खारिज, HC ने याचिकाकर्ता पर 10 हजार का जुर्माना भी ठोका

‘सोशल डिस्टेंसिंग’ शब्द पर आपत्ति वाली याचिका खारिज, HC ने याचिकाकर्ता पर 10 हजार का जुर्माना भी ठोका
Modified Date: November 29, 2022 / 08:44 pm IST
Published Date: May 8, 2020 11:43 am IST

नई दिल्ली। कोरोना के कारण दो लोगों के बीचर दूरी बनाए रखने के लिए उपयोग में लाया जाने वाला सोशल डिस्टेंसिंग शब्द पर आपत्ति जताने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उल्टा याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए 10 हज़ार रुपए का जुर्माना भी ठो​क दिया है।

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याचिकाकर्ता शकील कुरैशी ने इस शब्द को अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव भरा बताया था, याचिकाकर्ता की बात पर तीन सदस्यीय बेंच के सदस्य चौंक पड़े। बेंच के सदस्य जस्टिस कौल ने कहा, “आप इसमें भी अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक का मुद्दा ढूंढ लाए? भला बीमारी से बचने के लिए किए जा रहे उपाय पर आपको क्या आपत्ति है?”

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वकील एस बी देशमुख ने कहा, “बीमारी से लड़ने के लिए दो लोगों के बीच सुरक्षित दूरी जरूरी है, लेकिन इसे फिजिकल डिस्टेंसिंग कहना चाहिए। उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग और सामाजिक दूरी जैसे शब्द इस्तेमाल हो रहे हैं। हमारा मानना है कि यह शब्द भेदभाव भरे हैं। इससे अल्पसंख्यकों और दूसरे कमजोर तबकों से भेदभाव हो सकता है।“

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सुनवाई के दौरान मौजूद सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जजों की बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य शब्द सोशल डिस्टेंसिंग का सरल हिंदी अनुवाद सामाजिक दूरी है। इससे किसी को आपत्ति हो गई, यह हैरान करने वाली बात है। याचिकाकर्ता पर व्यर्थ याचिका दाखिल कर कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए 10 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।


लेखक के बारे में

डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल ​डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगो​ष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com