उच्च न्यायालय ने सिसोदिया के 2020 में निर्वाचन को चुनौती देने वाली अपील पर विचार करने से किया मना

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उच्च न्यायालय ने सिसोदिया के 2020 में निर्वाचन को चुनौती देने वाली अपील पर विचार करने से किया मना

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 06:32 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 06:32 PM IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई करने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया, जिसमें 2020 के विधानसभा चुनावों में पटपड़गंज से आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवार मनीष सिसोदिया के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने अपीलकर्ता प्रताप चंद्र से कहा कि एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ उनकी अपील उच्च न्यायालय में सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार इसे उच्चतम न्यायालय में दायर किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि यह अपील सुनवाई योग्य कैसे है और क्या चुनाव याचिकाओं के खिलाफ अंतरा-न्यायिक अपील दायर की जा सकती है? पीठ ने कहा कि अपील उच्चतम न्यायालय में ही दायर की जाएगी।

इसके बाद, अपीलकर्ता ने अपनी अपील वापस ले ली।

अदालत ने कहा कि अपील वापस ले ली गई है और इसे खारिज किया जाता है।

एकल न्यायाधीश ने 17 जनवरी को फैसला सुनाया था कि राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में सिसोदिया के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले प्रताप चंद्र अपनी चुनाव याचिका में कोई विशिष्ट कारण साबित करने में विफल रहे हैं।

सिसोदिया ने 70,163 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी। याचिकाकर्ता को केवल 95 वोट मिले थे।

याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उन्होंने कानून का कड़ाई से पालन करते हुए चुनाव से दो दिन पहले प्रचार बंद कर दिया था, जबकि अन्य राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों ने मतदान के दिन तक प्रचार जारी रखा, जिससे उन्हें निष्पक्ष चुने जाने का अवसर नहीं मिला।

उन्होंने यह भी दावा किया था कि सिसोदिया ने अपने नामांकन पत्र में, 2013 में दर्ज एक प्राथमिकी का खुलासा नहीं किया था।

अपने फैसले में, अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने कानून के अनुसार आवश्यक तथ्यों को प्रस्तुत किए बिना केवल ‘‘सामान्य आरोप’’ लगाए हैं।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश