उच्च न्यायालय ने लापता बच्ची के मामले में झारखंड सरकार से मांगा जवाब

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उच्च न्यायालय ने लापता बच्ची के मामले में झारखंड सरकार से मांगा जवाब

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 09:16 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 09:16 PM IST

रांची, नौ जुलाई (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 2018 से 2022 के बीच गुमला में तैनात पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के खिलाफ एक लापता बच्ची के मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी अदालत को दे।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से यह भी पूछा कि बच्ची के लापता रहने की अवधि के दौरान गुमला में तैनात जांच अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मुख्य आरोपी सुखमनी उरांव का नार्को विश्लेषण गुजरात स्थित निदेशालय फॉरेंसिक साइंसेज में कराया जाएगा।

खंडपीठ ने राज्य सरकार को नार्को टेस्ट की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर पेश करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त के लिए निर्धारित की।

सरकारी वकील ने बताया कि गुमला के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने आरोपी के नार्को टेस्ट की अनुमति दे दी है।

उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश के बाद राज्य सरकार ने गुजरात के फॉरेंसिक साइंस निदेशालय से संपर्क किया, जहां 3 से 11 अगस्त के बीच परीक्षण की तारीख तय की गई है।

यह मामला गुमला जिले के खोरा गांव से सितंबर 2018 में याचिकाकर्ता की छह वर्षीय बेटी के लापता होने से जुड़ा है।

याचिका के अनुसार, वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन जांच में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई और बच्ची का अब तक पता नहीं चल सका।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले की जांच वर्ष 2022 में शुरू हुई।

बाद में बच्ची की मां चंद्रमुनी उरांव ने सितंबर 2025 में उच्च न्यायालय का रुख करते हुए आशंका जताई कि हो सकता है कि उनकी बेटी मानव तस्करी का शिकार हुई हो।

भाषा शोभना माधव

माधव