भारी बारिश से देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर तबाही, आम जनजीवन अस्त-व्यस्त

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भारी बारिश से देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर तबाही, आम जनजीवन अस्त-व्यस्त

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 09:20 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 09:20 PM IST

(तस्वीर सहित)

नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) मूसलाधार मानसूनी बारिश ने बृहस्पतिवार को देश के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई, जिससे सड़कों पर पानी भर गया, बड़ी संख्या में पेड़ उखड़ गए, संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। अधिकारी पूरे दिन हालात को सामान्य बनाने की कोशिशों में जुटे रहे।

कई शहरों में सड़कें और रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए, जिसके चलते लोग घुटने तक भरे पानी से होकर गुजरते नजर आए, जबकि मुख्य मार्गों पर यातायात की रफ्तार बहुत धीमी हो गई। तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए, जिससे रास्ते बंद हो गए, जबकि बाढ़ की वजह से वाहनों की आवाजाही बाधित हुई और मकानों को नुकसान पहुंचा।

महाराष्ट्र में पुणे के पास पिंपरी-चिंचवड़ में उस जगह पर बचाव कार्य बृहस्पतिवार को भी जारी रहा, जहां एक दिन पहले भारी बारिश के कारण कचरे से बिजली पैदा करने वाले संयंत्र में कूड़े का बड़ा ढेर ढहने से एक इमारत गिर गई थी।

बृहस्पतिवार को इमारत के मलबे से एक शव बरामद किया गया, जबकि करीब आठ लोगों के अब भी फंसे होने की आशंका है। अब तक नौ लोगों को बचाया जा चुका है।

दिल्ली में बृहस्पतिवार को इस मौसम की सबसे भारी बारिश हुई, जिससे जगह-जगह जल-जमाव हो गया, पेड़ उखड़ गए और लोगों को भारी यातायात जाम का सामना करना पड़ा।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बृहस्पतिवार को दिल्ली के लिए ‘रेड’ अलर्ट जारी किया, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी के मुख्य मौसम केंद्र सफदरजंग में सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटों में 72.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी इलाके के तुकमीरपुर में सबसे ज्यादा 160 मिलीमीटर वर्षा हुई।

विकास मार्ग, पूर्वी दिल्ली के कुछ हिस्सों, नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन, मुनिरका, सदर बाजार और द्वारका से जलभराव की खबरें सामने आईं। दिल्ली-नोएडा एक्सप्रेसवे पर यातायात की रफ्तार बहुत धीमी रही। जंगपुरा के कुछ इलाकों में पैदल चलने वालों और वाहनों को घुटने तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। दोपहिया वाहन चालकों को पानी से भरी सड़कों पर अपनी गाड़ियों को धक्का देकर ले जाते हुए देखा गया।

कई यात्रियों और स्थानीय निवासियों ने सोशल मीडिया पर अपनी परेशानी साझा की।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने विधानसभा क्षेत्र के शालीमार गांव में जल निकासी व्यवस्था का निरीक्षण किया और अधिकारियों को पानी की सही निकासी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

वहीं, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने आईटीओ स्थित पीडब्ल्यूडी कंट्रोल रूम का दौरा कर जल निकासी व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि ज्यादातर जगहों पर जमा पानी हटा दिया गया है और ‘हालात पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर हैं।’

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने कहा कि उसने ‘स्टॉर्मवॉटर ड्रेन’ (बारिश के पानी को प्राकृतिक जलस्रोतों में बहाने वाले नालों) से अब तक 57,000 मीट्रिक टन गाद हटाई है। उसने कहा कि जलभराव से जुड़ी शिकायतों के लिए चौबीस घंटे काम करने वाली एक समर्पित हेल्पलाइन भी शुरू की जा रही है।

गुरुग्राम में बृहस्पतिवार सुबह भारी बारिश के कारण एक लग्जरी अपार्टमेंट की बालकनी का एक हिस्सा गिर गया। हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। निवासियों ने घटना के लिए बिल्डर की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया और पूरी आवासीय परियोजना का संरचनात्मक ऑडिट कराने की मांग की।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में नोएडा, गाजियाबाद, गाजीपुर और फरीदाबाद से भी बड़े पैमाने पर जलभराव और यातायात जाम की खबरें मिलीं।

नोएडा में सेक्टर 16, 33, 12, 62 और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों सहित कई इलाकों में जलजमाव के कारण लोगों को भारी यातायात जाम का सामना करना पड़ा।

राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर पर गाजीपुर सीमा के पास भारी जलभराव के कारण दिल्ली-गाजीबाद मार्ग पर लंबा यातायात जाम लग गया।

गाजियाबाद जिला प्रशासन ने बारिश से उत्पन्न हालात के चलते सरकारी स्कूलों में छुट्टी की घोषणा कर दी।

गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में निर्माणाधीन बेसमेंट के पास सड़क का एक हिस्सा भारी बारिश के कारण धंस गया, जिससे वहां खड़ी एक कार और एक स्कूटर गड्ढे में गिर गए। हालांकि, इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ।

राजस्थान में कई जगहों पर भारी बारिश हुई। मौसम विभाग ने कोटा और भरतपुर संभाग के कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया।

चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर और निम्बाहेड़ा तथा भरतपुर जिले के बयाना में नौ सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो बृहस्पतिवार सुबह तक पिछले 24 घंटे में राज्य के किसी इलाके में हुई सबसे ज्यादा बारिश थी।

मौसम विभाग के मुताबिक, राजस्थान में 10 जुलाई को भरतपुर संभाग और उससे सटे जिलों में कुछ जगहों पर भारी बारिश जारी रहने, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में बारिश कम होने का अनुमान है।

विभाग ने कहा कि 11 जुलाई से राजस्थान के ज्यादातर हिस्सों में लगभग एक हफ्ते तक बारिश के सिलसिले में थोड़ी कमी आने की संभावना है।

उत्तराखंड के अधिकतर क्षेत्रों में पिछले 24 घंटों से लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया और पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन के कारण सौ से अधिक मार्ग अवरूद्ध हो गए। वहीं, मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार को देहरादून सहित सात जिलों में बहुत भारी वर्षा का ‘रेड अलर्ट’ और बाकी जिलों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया।

भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने शुक्रवार को सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के साथ-साथ आंगनवाड़ी केंद्रों में छुट्टी की घोषणा की है।

आईएमडी ने अगले 24 घंटे में देहरादून में गरज-चमक और आंधी के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया है।

आईएमडी ने बृहस्पतिवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बाकी हिस्सों में भी पहुंच गया है, जिसके साथ ही पूरे देश में इसकी दस्तक हो गई है।

विभाग ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूरे देश में पहुंचने में एक दिन की देरी हुई है, क्योंकि आमतौर पर आठ जुलाई को देशभर में इसका आगमन हो जाता है।

मानसून इस साल चार जून को केरल पहुंचा, जिससे देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (जून-सितंबर) की शुरुआत हुई। आमतौर पर यह राज्य में एक जून को दस्तक देता है।

भारत में इस साल जुलाई में अब तक सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश हुई है। आईएमडी के मुताबिक, महीने के शुरुआती नौ दिनों में देशभर में 101.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जो इस अवधि में होने वाली सामान्य वर्षा 73.8 मिलीमीटर से कहीं ज्यादा है।

केरल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश जारी रहने के कारण आईएमडी ने बृहस्पतिवार को राज्य के तीन जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया, जिनमें मलप्पुरम, कोझिकोड और वायनाड शामिल हैं।

विभाग ने राज्य के छह अन्य जिलों-एर्नाकुलम, इडुक्की, त्रिशूर, पलक्कड़, कन्नूर और कासरगोड़-के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया।

‘ऑरेंज अलर्ट’ का मतलब 115 मिलीमीटर से 204 मिलीमीटर तक बहुत भारी बारिश और ‘येलो अलर्ट’ का मतलब 64 मिलीमीटर से 115 मिलीमीटर के बीच भारी बारिश से है।

बारिश की वजह से राज्य के कई हिस्सों में पेड़ उखड़ने और टहनियां टूटने से संपत्ति का नुकसान हुआ। केरल के अलग-अलग इलाकों से सड़कों पर पानी भरने और निचले इलाकों में बाढ़ आने की भी खबरें मिलीं।

वायनाड में भूस्खलन वाली जगह से बृहस्पतिवार को दो और शव मिलने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई, जबकि तीन लोग अब भी लापता हैं।

वायनाड और कोझिकोड के बीच संपर्क बेहतर बनाने के लिए निर्माणाधीन अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना स्थल पर सात जुलाई को भूस्खलन हुआ था।

अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र के ठाणे जिले में पिछले हफ्ते मानसून से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई और लगभग 800 लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाना पड़ा, जबकि मौसम से जुड़ी हालिया घटना में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दो लोग झुलस गए।

अधिकारियों ने कहा कि भारी बारिश से ठाणे में बड़े पैमाने पर आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जिसके कारण आपातकालीन टीमों को 229 परिवारों के 797 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा है।

उन्होंने बताया कि ठाणे में भारी बारिश के चलते बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है और जिले में 136 मकान आंशिक रूप से या पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

उधर, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ से 100 फुट लंबा लोहे का पुल डूब गया, जिससे लिप्पा गांव का बाकी इलाकों से संपर्क टूट गया।

अधिकारियों ने बताया कि लिप्पा पंचायत में पेजर नाले में पानी का बहाव अचानक बहुत बढ़ जाने से टेटी खड्ड का बहाव रुक गया, जिसके कारण लोहे का पुल पूरी तरह पानी में डूब गया। उन्होंने बताया कि पुल के पास बने कई मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार से लगातार हो रही बारिश के कारण किन्नौर की कई नदियों और नालों में पानी का स्तर सामान्य से काफी ऊपर चला गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है।

सोलन जिले में कसौली के पास शिलर-पठिया लिंक रोड पर मलबा गिरने से क्षेत्र में यातायात प्रभावित हुआ।

शिमला मौसम विभाग ने राज्य में कुछ जगहों पर 15 जुलाई तक भारी बारिश का अनुमान जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है।

अधिकारियों ने लोगों से जलाशयों के पास न जाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की।

बुधवार शाम से ही हिमाचल के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो रही है, जबकि शिमला, कांगड़ा और जोट में आंधी और गरज-चमक के साथ छीटें पड़े हैं।

सिरमौर के नाहन में सबसे ज्यादा 89.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सोलन में 46.8 मिलीमीटर, चंबा के जोट में 45.2 मिलीमीटर, मलौण में 41 मिलीमीटर, सराहन में 38.7 मिलीमीटर, पांवटा साहिब में 34.4 मिलीमीटर, कल्पा में 29.9 मिलीमीटर, बिलासपुर में 24.8 मिलीमीटर, गुलेर में 24.4 मिलीमीटर, शिमला और जटोन बैराज में से प्रत्येक में 23.2 मिलीमीटर, धौलाकुआं में 20.9 मिलीमीटर और रोहरू में 20.5 मिलीमीटर वर्षा हुई।

अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश में अधिकतम तापमान में काफी गिरावट आई। उन्होंने बताया कि कांगड़ा बृहस्पतिवार को 32.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ राज्य का सबसे गर्म स्थान, जबकि कुकुमसेरी 10.6 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के साथ सबसे ठंडा स्थान रहा।

भाषा पारुल माधव

माधव