10 दिन से ज्यादा युद्ध नहीं कर पाएगी भारतीय सेना, गोला-बारूद की भारी कमी

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10 दिन से ज्यादा युद्ध नहीं कर पाएगी भारतीय सेना, गोला-बारूद की भारी कमी

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  • Publish Date - July 22, 2017 / 10:32 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:00 PM IST

भारत-चीन के बीच जारी सीमा विवाद को लेकर दोनों देश एक-दूसरे को जंग की धमकी दे रहे हैं. वहीं कैग ने जो रिपोर्ट जारी किया है उसने देश को चिंता में डाल दिया है कैग की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सेना के पास लंबे समय तक के युद्ध के लिए पर्याप्त गोला-बारुद नहीं है. CAG ने भारतीय सेना के पास गोला-बारुद की भारी कमी होने की रिपोर्ट संसद में पेश की है.

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भारतीय सेना को लगातार 10 दिन युद्ध करना पड़ गया तो उसके पास पर्याप्त गोला-बारूद नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य मुख्यालय ने 2009-13 के बीच खरीदारी के जिन मामलों की शुरुआत की, उनमें अधिकतर जनवरी 2017 तक लंबित थे। ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड के कामकाज की तीखी आलोचना करते हुए कहा गया है कि 2013 से ओएफबी की ओर से आपूर्ति किए जाने वाले गोला-बारूद की गुणवत्ता और मात्रा में कमी पर ध्यान दिलाया गया, लेकिन इस दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। 

कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की ऑर्डिंनेस फैक्ट्रियां पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाने के साथ क्षतिग्रस्त सामानों की मरम्मत भी नहीं कर पा रही हैं। गोला-बारूद के डिपो में अग्निशमनकर्मियों की कमी रही और उपकरणों से हादसे का खतरा रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनवरी में आर्मी के गोला-बारूद मैनेजमेंट का फॉलोअप ऑडिट किया गया।  

बताया गया है कि ऑपरेशन की अवधि की जरूरतों के हिसाब से सेना में वॉर वेस्टेज रिजर्व रखा जाता है। रक्षा मंत्रालय ने 40 दिन की अवधि के लिए इस रिजर्व को मंजूरी दी थी। 1999 में आर्मी ने तय किया कि कम से कम 20 दिन की अवधि के लिए रिजर्व होना ही चाहिए। सितंबर 2016 में पाया गया कि सिर्फ 20 फीसदी गोला-बारूद ही 40 दिन के मानक पर खरे उतरे। 55 फीसदी गोला बारूद 20 दिन के न्यूनतम स्तर से भी कम थे। हालांकि इसमें बेहतरी आई है, लेकिन बेहतर फायर पावर को बनाए रखने के लिए बख्तरबंद वाहन और उच्च क्षमता वाले गोला-बारूद जरूरी लेवल से कम पाए गए। 

 

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