Holi ki Chhutti 2026 Kab Se Hai: होली पर 4 दिन की सरकार छुट्टी, बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज सहित सभी सरकारी संस्थाएं, जानिए कब से कब तक रहेगा अवकाश / Image: IBC24 Customized
रायपुर: Holi ki Chhutti 2026 Kab Se Hai भारत को जहां एक ओर कृषि प्रधान देश के तौर पर जाना जाता है तो दूसरी ओर देश की पहचान त्योहारों को लेकर भी पूरी दुनिया में अलग है। कहा जाता है कि भारत में पूरे साल भर अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं। यहां हर राज्य में अलग-अलग समय में त्योहार मनाया जाता है। वहीं, आगामी दिनों में होली का त्योहार मनाया जाएगा। प्रेम और भाई चारा के इस त्योहार होली पर लोग एक दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं देते हैं। लेकिन इस बार सरकारी कर्मचारियों के लिए होली बेहद खास होने वाली है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार होली में सरकारी कर्मचारियों को 4 दिन की छुट्टी मिलने वाली है।
Holi ki Chhutti 2026 Kab Se Hai मिली जानकारी के अनुसार इस साल होली 4 मार्च को मनाया जाएगा। अगर आप कैलेंडर देखेंगे तो 28 फरवरी शनिवार, 1 मार्च रविवार और सोमवार गैप के बाद फिर मंगलवार 3 मार्च और बुधवार को 4 मार्च को होली की दो दिन की छुट्टी मिलेगी। ऐसे में आपके पास होली मनाने का 4 दिन का मौका है। ऐसे में अगर आप किसी खास जगह जैसे वृंदावन, जगन्नाथ पुरी, बनारस या उदयपुर जाकर होली मनाना चाहते हैं तो सुनहरा अवसर है।
ब्रज की होली अपने आप में निराली है, और नंदगांव (भगवान कृष्ण का गांव) की होली का अपना एक विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यहाँ की होली मुख्य रूप से बरसाना के साथ जुड़ी हुई है, जिसे ‘लठमार होली‘ के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना में राधा जी और उनकी सखियों के साथ होली खेलने जाते थे। गोपियाँ उन्हें प्यार भरी लाठियों से मारती थीं और कृष्ण मुस्कुराते हुए ढाल से बचाव करते थे। नंदगांव के लोग खुद को ‘कृष्ण सखा’ और बरसाना के लोग खुद को ‘राधा पक्ष’ का मानते हैं, जिससे यह उत्सव एक पारिवारिक और आध्यात्मिक मिलन बन जाता है।
नीले रंग से रंगी दीवारों और मेहरानगढ़ किले की भव्य छांव में जोधपुर की होली एक अलग ही अनुभव देती है। यहां की होली में दिखावा नहीं, बल्कि प्रेम और अपनापन झलकता है। यहां की सबसे खास परंपरा है ‘गैर नृत्य’ पुरुषों का यह सामूहिक लोकनृत्य इतना मशहूर है कि इसे देखने के लिए जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से पर्यटक खिंचे चले आते हैं। विदेशी सैलानी पुराने शहर की संकरी गलियों में स्थानीय लोगों के साथ होली खेलते हैं।
झीलों की नगरी उदयपुर में होली का अनुभव राजसी, सुंदर और सांस्कृतिक होता है। पिछोला झील के किनारे और पुराने महलों के आसपास रंगों के उत्सव का एक अलग ही नजारा देखा जाता है। यहां होलिका दहन का आयोजन शाही परिवार की ओर से किया जाता है, जिसे मेवाड़ होलिका दहन कहते हैं। शाम के समय लोक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम माहौल को आकर्षक बना देते हैं। यहां मेनार गांव में होली बारूद से खेली जाती है। यह वीर योद्धाओं के सम्मान में एक परंपरा है, जिसमें बंदूकें और तोपें चलाई जाती हैं। साथ ही पटाखे जलाए जाते हैं।