चंडीगढ़, 24 फरवरी (भाषा) हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को राज्य विधानसभा को सूचित किया कि उनकी सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में बकाया लगभग 556 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं।
सैनी ने कहा, “लगभग 22 करोड़ रुपये ब्याज सहित करीब 556 करोड़ रुपये 24 घंटे के भीतर वापस हासिल कर लिए गए।”
आईडीएफसी बैंक ने रविवार को खुलासा किया था कि उसके कर्मचारियों और अन्य लोगों ने हरियाणा सरकार के बैंक खातों में जमा 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है।
सैनी ने कहा, “मैं सदन के समक्ष यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हरियाणा सरकार के विभागों से संबंधित धनराशि पूरी तरह से हमारे खातों में वापस जमा करा दी गई है… वसूली 24 घंटे के भीतर कर ली गई है।”
उन्होंने कहा कि बैंक ने सरकार को सूचित किया था कि इस घटना में मुख्य रूप से बैंक की चंडीगढ़ स्थित एक विशेष शाखा शामिल थी और पूरी धोखाधड़ी में मध्यम एवं निचले स्तर के चार से पांच बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति-चाहे वह बैंक कर्मचारी हो, निजी व्यक्ति हो या सरकारी कर्मचारी हो-को बख्शा नहीं जाए।
सोमवार को सैनी ने कहा था कि राज्य का भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो इस धोखाधड़ी की गहन जांच करेगा।
उन्होंने कहा था, “हमने इस पूरे मामले की जांच के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है।”
सैनी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के शासनकाल में घोटालों को दबा दिया जाता था और किसी को भी जवाबदेह नहीं ठहराया जाता था, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार भ्रष्टाचार के प्रति कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपना रही है।
हरियाणा विधानसभा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी का मुद्दा विपक्षी दल कांग्रेस ने उठाया था।
भाषा पारुल रंजन
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