इस कठिन दौर में लोगों के एकजुट होने, असली दुश्मनों की पहचान करने का समय आ गया है: मुख्यमंत्री

इस कठिन दौर में लोगों के एकजुट होने, असली दुश्मनों की पहचान करने का समय आ गया है: मुख्यमंत्री

इस कठिन दौर में लोगों के एकजुट होने, असली दुश्मनों की पहचान करने का समय आ गया है: मुख्यमंत्री
Modified Date: January 29, 2024 / 03:17 pm IST
Published Date: January 29, 2024 3:17 pm IST

इंफाल, 29 जनवरी (भाषा) मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने सोमवार को कहा कि राज्य कठिन दौर से गुजर रहा है और अब समय आ गया है कि लोग एकजुट हों और पहचानें कि असली दुश्मन कौन है।

इंफाल रिंग रोड परियोजना के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम आज एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं। यह पहली बार नहीं है कि हम कठिन दौर का सामना कर रहे हैं। 1992-1993 के जातीय संघर्ष के दौरान 1,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। आज हम संघर्ष कर रहे हैं। हम उन तत्वों से निपट रहे हैं जो 2,000 साल से अधिक के इतिहास वाले राज्य को तोड़ना चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य पिछले नौ महीने से अधिक समय से सोया नहीं है।’’

सिंह ने कहा, ‘‘हम उन्हें कभी भी जीतने या उनके मंसूबों में कामयाबी हासिल करने की अनुमति नहीं देंगे। सीमा क्षेत्रों में 3,000 से अधिक राज्य बलों को तैनात किया गया है।’’ उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ‘‘इंफाल घाटी में अशांति न फैलाएं। घाटी को शांतिपूर्ण रहने दें। मणिपुर की रक्षा ही हमारा एकमात्र कर्तव्य है। अब और रैलियां नहीं। आइए राज्य के असली दुश्मनों की पहचान करें और उनका सामना करें।’’

उन्होंने दावा किया कि पिछले छह वर्षों में राज्य में काफी सुधार हुआ है और पुलिस एवं जनता के बीच संबंध बेहतर हुए हैं।

सिंह ने कहा, ‘‘हम उन तत्वों को बर्दाश्त नहीं कर सकते जो नशीली दवाओं की आपूर्ति करते हैं तथा बड़े पैमाने पर वनों की कटाई और अफीम की खेती में संलग्न होकर और बाहर से अवैध अप्रवासियों को लाकर राज्य को नष्ट करना चाहते हैं।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमें एकजुट होने और आरोप लगाना बंद करने की जरूरत है। गलतियां हो सकती हैं लेकिन अपनी धरती को बचाने के लिए हमें माफ करना होगा और गलतियों को भूला देना होगा।’’

इंफाल रिंग रोड परियोजना पर सिंह ने कहा कि 1,700 करोड़ रुपये की परियोजना बढ़ती आबादी और राजधानी इंफाल के भीतर बढ़ती यातायात भीड़ के कारण शुरू की गई।

परियोजना 2015-16 से ही शुरू होने वाली थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद 2020 में इसमें तेजी लाई गई। परियोजना एशियाई विकास बैंक द्वारा वित्त पोषित है।

भाषा सुरभि नरेश

नरेश


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