नयी दिल्ली, 20 सितंबर (भाषा) कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने रविवार को कहा कि भारत को अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए अमेरिका के नये शुल्क को खारिज करना चाहिए और मुद्दों का समाधान होने तक अमेरिका के साथ ‘‘गैर-बराबरी’’ वाले व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने से बचना चाहिए।
शर्मा ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित ‘लिंडसे ग्राहम अधिनियम’ का भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह अधिनियम ट्रंप को तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का अधिकार देता है, जो ‘‘गंभीर चिंता’’ का विषय है।
पूर्व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत रूसी कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक है और इस साल उसके कच्चे पेट्रोलियम आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी आधे से अधिक रही है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमले के कारण दुनियाभर में तेल और गैस आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा हुआ तथा कीमतों में तेज वृद्धि हुई।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘भारत सहित रणनीतिक साझेदार देशों को मनमाने तरीके से निशाना बनाया जाना अनुचित, अस्वीकार्य और निंदनीय है। यह चयनात्मक और भेदभावपूर्ण भी है, क्योंकि अमेरिका नाटो सदस्य देशों – तुर्की, हंगरी और स्लोवाकिया पर यह शुल्क नहीं लगाएगा, क्योंकि वे रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत को इस तरह के किसी भी शुल्क का दृढ़ता से विरोध करना चाहिए और साझेदार देशों के साथ व्यापार एवं आर्थिक सहयोग की अपनी संप्रभुता की रक्षा करनी चाहिए। जब तक शुल्क से जुड़े मुद्दों का पूरी तरह समाधान नहीं हो जाता, तब तक हमें अमेरिका के साथ गैर-बराबरी वाले व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए।’’
अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को प्रतिनिधि सभा के विधेयक एच.आर. 5334 ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम, 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दिया। यह रूस पर वैधानिक प्रतिबंधों, शुल्क एवं अन्य पाबंदियों को लागू करने एवं उनका दायरा बढ़ाने और ईरान पर लागू मौजूदा प्रतिबंधों की अवधि बढाने का अधिकार देता है।’’
इस कानून के तहत मॉस्को और उसके प्रमुख ऊर्जा खरीदारों, जैसे चीन और भारत, पर भारी शुल्क लगाने का प्रावधान है।
भाषा शफीक सुरेश
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