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कोलकाता, चार अगस्त (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी विरासत का ‘‘अपमान’’ करने का आरोप लगाया।
बनर्जी का यह बयान नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस के तृणमूल से इस्तीफा देने के एक दिन बाद आया है।
बोस ने मुख्यधारा के राजनीतिक दलों से खुद का ‘‘मोहभंग’’ होने की बात कहते हुए दावा किया था कि उन्हें भाजपा और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल की राजनीति में ‘‘कोई अंतर’’ नजर नहीं आता।
बनर्जी ने ‘फेसबुक’ पर लाइव के दौरान कहा, ‘‘देश के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महान नायकों में से एक नेताजी के बारे में भाजपा नेताओं ने जिस तरह की बातें कीं, उससे मैं स्तब्ध हूं। जिन लोगों को न राजनीति की समझ है, न भारत की संस्कृति की और न ही बंगाल के इतिहास की, वे जिस तरह नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अपमान कर रहे हैं, उससे मुझे गहरा दुख और आघात पहुंचा है। यह केवल बंगाल का नहीं, बल्कि पूरे देश का अपमान है।’’
उन्होंने लोगों से नेताजी के कथित अपमान के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करने की अपील करते हुए कहा कि उनकी पार्टी की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) टीम छात्रों, युवाओं और डिजिटल समुदाय तक पहुंचकर विरोध दर्ज कराएगी।
ममता बनर्जी की यह टिप्पणी भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा हाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में की गई टिप्पणियों की पृष्ठभूमि में आई है, जिन्हें विपक्षी दलों ने नेताजी और उनकी राजनीतिक विरासत के प्रति अपमानजनक बताया है।
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने छह जुलाई को कोलकाता में जनसंघ के संस्थापक और भाजपा के वैचारिक पुरोधा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में नेताजी द्वारा स्थापित अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी) के सदस्यों को ‘‘गुंडा’’ बताया था।
उन्होंने मुखर्जी से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए यह टिप्पणी की थी।
राज्यसभा सदस्य भट्टाचार्य ने यह भी दावा किया था कि जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अविभाजित बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनके भाई शरत चंद्र बोस से आवाज उठाने का आग्रह किया था, तब दोनों ने उनकी बात नहीं मानी।
इन टिप्पणियों की एआईएफबी, अन्य विपक्षी दलों और नेताजी के परिवार के कुछ सदस्यों ने आलोचना करते हुए इन्हें इतिहास का विकृतिकरण और नेताजी का अपमान बताया था।
भाजपा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि ये घटनाएं नेताजी के प्रति अनादर नहीं, बल्कि राजनीतिक मतभेदों की अभिव्यक्ति थीं।
इसके कुछ दिन बाद भाजपा के राज्यसभा सदस्य तथा उत्तर बंगाल के राजबंशी समुदाय के प्रमुख नेताओं में शामिल नागेंद्रनाथ राय उर्फ अनंत महाराज ने भी देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में नेताजी की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
नागेंद्रनाथ ने दावा किया था कि नेताजी में आजाद हिंद फौज जैसी सेना संगठित करने और खड़ी करने की क्षमता नहीं थी तथा यह सेना वास्तव में ‘‘ब्रिटिश सैनिकों की एक इकाई’’ थी।
ममता बनर्जी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि देश जानता है कि नेताजी का जन्म कब हुआ था, लेकिन उनकी मृत्यु कब और कैसे हुई, यह आज भी रहस्य बना हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सत्ता में आने से पहले भाजपा ने नेताजी के लापता होने से संबंधित फाइलें सार्वजनिक करने का वादा किया था। वे फाइलें अब कहां हैं? और किस अलमारी में बंद हैं?’’
बनर्जी ने कहा, ‘‘जो लोग आज नेताजी का अपमान कर रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया, योजना आयोग की स्थापना की और देश की आजादी से पहले अंडमान द्वीपसमूह में स्वतंत्र भारत का तिरंगा फहराया था।’’
बनर्जी ने आरोप लगाया कि कोलकाता में प्रस्तावित परिसीमन की प्रक्रिया बंद कमरों में तैयार की जा रही है और तृणमूल समेत राजनीतिक दलों से बिना परामर्श किए जनगणना की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें नहीं पता कि जनगणना में किसका नाम शामिल किया जाएगा और किसका नाम बाहर कर दिया जाएगा। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 32 लाख नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए थे। क्या यह भी वैसी ही प्रक्रिया होगी?’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम न्याय की उम्मीद में उच्चतम न्यायालय भी गए, लेकिन मुझे लगता है कि न्याय अब भी दूर है। इसलिए मेरा मानना है कि अब व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन और जनजागरण की आवश्यकता है।’’
तृणमूल छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए पूर्व सांसदों द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठकों में हिस्सा लेने तथा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से दिल्ली में मुलाकात करने के संदर्भ में बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के सांसदों और विधायकों को धमकाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा हमारे सांसदों और विधायकों को डराने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का इस्तेमाल कर रही है। स्थानीय पुलिस के माध्यम से भी उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे भाजपा की पसंद की पार्टी में शामिल हो जाएं, अन्यथा जेल जाने के लिए तैयार रहें। क्या यही पुलिस का काम है?’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा न केवल हर संभव तरीके से सरकारें बना रही है, बल्कि वह अपना विपक्ष भी खुद चुन रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रवृत्ति के खिलाफ जल्द ही व्यापक जनाक्रोश देखने को मिलेगा। भाजपा जितना मुझे रोकने की कोशिश करेगी, मैं उतनी ही मजबूती से उसका सामना करूंगी।’’
‘जेन-जेड’ आंदोलन के प्रति एकजुटता जताते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं को राष्ट्रविरोधी बताया जा रहा है, उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके परिवारों को भी धमकाया जा रहा है।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद पश्चिम बंगाल में तृणमूल के हजारों कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ने पूरे राज्य को एक बड़ी जेल में बदल दिया है।’’
संभावित राजनीतिक साजिश की ओर संकेत करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद उनकी पुस्तकों की रॉयल्टी भी उन्हें मिलनी बंद हो गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी वेतन या पेंशन नहीं ली। मैं अपनी पुस्तकों की रॉयल्टी से जीवनयापन करती हूं, लेकिन इस वर्ष पाठकों द्वारा किताबें खरीदे जाने के बावजूद मुझे उसका भुगतान नहीं मिला है।’’
भाषा रवि कांत जितेंद्र
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