वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने पर दुर्घटना मुआवजे के लिए बीमा कंपनी जिम्मेदार नहीं : उच्चतम न्यायालय
वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने पर दुर्घटना मुआवजे के लिए बीमा कंपनी जिम्मेदार नहीं : उच्चतम न्यायालय
नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि यदि दुर्घटना के समय वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस वैध नहीं था या उसका नवीनीकरण नहीं हुआ था, तो बीमा कंपनी मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं होगी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि दुर्घटना करने वाला वाहन बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के चलाया जा रहा था, तो बीमा कंपनी पर मुआवजे का दायित्व नहीं डाला जा सकता।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि बिना वैध लाइसेंस के वाहन चलाने की प्रवृत्ति के कारण दुर्घटना के मामलों में चालक, वाहन मालिक या दोनों को भारी-भरकम मुआवजा चुकाने की नौबत आ सकती है। न्यायालय ने इस संबंध में लोगों को जागरूक करने के लिए देशव्यापी अभियान चलाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा राज्यों के परिवहन विभागों से सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और यातायात नियमों के पालन को सुदृढ़ करने के लिए देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाने को कहा।
पीठ ने मंत्रालय और राज्यों को सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों के जरिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने तथा ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने का भी निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने ड्राइविंग स्कूलों के नियमन, उन्हें किफायती बनाने तथा लाइसेंस के लिए आवेदन और परीक्षा की प्रक्रिया को क्षेत्रीय भाषाओं में सुलभ बनाने के लिए भी तत्काल सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।
न्यायमूर्ति करोल ने फैसले में कहा, ‘‘भारत सरकार का सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा राज्यों के संबंधित विभागों को जागरूकता अभियान, सोशल मीडिया और अन्य सभी माध्यमों के जरिए लोगों को इस विषय के महत्व से अवगत कराना चाहिए, नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के उपाय करने चाहिए और लाइसेंस जारी करने तथा उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया को भी सुव्यवस्थित बनाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ड्राइविंग स्कूलों के नियमन, उनकी वहनीयता तथा आवेदन और परीक्षा की प्रक्रिया को क्षेत्रीय भाषाओं में सुलभ बनाने जैसे मुद्दों पर भी तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।’’
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें बीमा कंपनी पर मुआवजे का दायित्व डाला गया था।
यह मामला वर्ष 2009 की एक सड़क दुर्घटना से संबंधित है, जिसमें ओम प्रकाश द्वारा चलाया जा रहा एक वाहन दोपहिया वाहन से टकरा गया था।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने मूल रूप से माना था कि चालक का ड्राइविंग लाइसेंस दुर्घटना से काफी पहले समाप्त हो चुका था और उसका नवीनीकरण काफी बाद में कराया गया था। इसलिए बीमा कंपनी ‘रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं है।
उच्च न्यायालय ने हालांकि इस निर्णय को पलटते हुए लाइसेंसिंग प्राधिकारी के एक पत्र को स्वीकार किया था, जिसमें कहा गया था कि वर्ष 2007 से 2010 के बीच के लाइसेंस संबंधी अभिलेख दो सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के बीच आंकड़ों के स्थानांतरण के दौरान तकनीकी त्रुटि के कारण नष्ट हो गए थे।
उच्च न्यायालय ने बीमा कंपनी को संशोधित मुआवजे के रूप में 1.08 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया था।
उच्चतम न्यायालय ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद कहा कि ‘अभिलेख गायब होने’ संबंधी सिद्धांत पर उच्च न्यायालय का भरोसा उचित नहीं था।
शीर्ष अदालत ने हालांकि बीमा कंपनी को अंतिम दायित्व से मुक्त कर दिया, लेकिन दावा करने वालों के हितों की भी रक्षा की।
‘पे एंड रिकवर’ (पहले भुगतान, बाद में वसूली) सिद्धांत के तहत पीठ ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह पहले दावा करने वालों को मुआवजे की राशि का भुगतान करे और उसके बाद पूरी राशि वाहन मालिक और चालक से वसूल करे।
पीठ ने कहा कि वह इस तथ्य की अनदेखी नहीं कर सकती कि चालक या वाहन मालिक पर इतनी बड़ी राशि का भुगतान करने का दायित्व डालना उनके लिए अत्यंत भारी बोझ है।
पीठ ने कहा, ‘‘यह उनके पूरे जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है, केवल इसलिए कि चालक और वाहन मालिक ने यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सावधानी नहीं बरती कि ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता में कोई अंतराल न आए। यदि ऐसा किया गया होता, तो यह बोझ उन पर नहीं पड़ता और अपीलकर्ता बीमा कंपनी मुआवजे का भुगतान करने के लिए बाध्य होती।’’
उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘हमारे विचार में यह ड्राइविंग लाइसेंस के महत्व को रेखांकित करता है। यह ऐसा दस्तावेज है जो सड़क पर वाहन चलाने की क्षमता का प्रमाण देता है। इसलिए यह स्वाभाविक है कि प्रत्येक चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।’’
इसके साथ ही अदालत ने केंद्र और राज्यों को इस संबंध में देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया।
भाषा रवि कांत प्रशांत
प्रशांत

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