तेलंगाना में आंध्र के नेताओं के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा : कविता

तेलंगाना में आंध्र के नेताओं के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा : कविता

तेलंगाना में आंध्र के नेताओं के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा : कविता
Modified Date: June 1, 2026 / 07:21 pm IST
Published Date: June 1, 2026 7:21 pm IST

हैदराबाद, एक जून (भाषा) तेलंगाना के मामलों में पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के नेताओं द्वारा हस्तक्षेप करने की कोशिश का आरोप लगाते हुए, टीआरएस अध्यक्ष के. कविता ने सोमवार को कहा कि वह शासन और सांस्कृतिक क्षेत्र में इस तरह के किसी भी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगी।

तेलंगाना रक्षण सेना (टीआरएस) की संस्थापक ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता में आने पर वह तेलंगाना के लोगों की इच्छा के विरुद्ध हैदराबाद में स्थापित आंध्र प्रदेश की हस्तियों की मूर्तियों को तोड़ने में जरा भी संकोच नहीं करेंगी।

उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को मंगलवार को तेलंगाना स्थापना दिवस के अवसर पर, राज्य के लिए संघर्ष करने वालों से सत्तारूढ़ कांग्रेस के चुनाव-पूर्व वादों के कार्यान्वयन के संबंध में घोषणा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के राजनीतिक नेताओं को तेलंगाना के लोगों को नीचा नहीं दिखाना चाहिए और तेलंगाना पर “सांस्कृतिक वर्चस्व” दिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

कविता ने कहा, “ (तेलंगाना को) जो नुकसान हुआ है, उसका कारण यह है कि उनके एजेंट यहां के मुख्यमंत्री हैं। वे अलग-अलग तरह की मूर्तियां स्थापित कर रहे हैं। मैंने पहले भी कहा था। मैं अतीत के नेताओं जितनी अच्छी नहीं हूं। हम सत्ता में जरूर आएंगे। अगर आप इसी तरह करते रहे, तो हम सभी मूर्तियों को तोड़कर पार्सल से आंध्र प्रदेश भेज देंगे। मुझमें अब उतना धैर्य और इतनी उदारता नहीं है।”

वह संभवतः तेदेपा संस्थापक एन.टी. रामाराव की प्रतिमा का जिक्र कर रही थीं, जिसका अनावरण हाल ही में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में किया था।

कविता ने कहा कि आंध्र प्रदेश के निवेशकों का तेलंगाना में स्वागत है।

उन्होंने कहा, “हमारी समस्या उनसे (निवेशकों से) नहीं है। हमारी समस्या आंध्र प्रदेश के उन नेताओं से है जो सचिवालय के मामलों में दखलंदाजी करने की बात कहते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी हैदराबाद में बसे आंध्र प्रदेश मूल के लोगों का ख्याल रखेगी।

भाषा

प्रशांत अविनाश

अविनाश


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