नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा ने शुक्रवार को आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य को आरोप मुक्त किये जाने का स्वागत करते हुए दावा किया कि इससे साबित होता है कि भाजपा ने संघीय जांच एजेंसियों को ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार’’ बना दिया है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर यह भी कहा कि ‘‘सत्ता के दुरुपयोग’’ के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राजा ने कहा, ‘दिल्ली की एक अदालत ने शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सभी 23 आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया है। इन्होंने महीनों जेल में बिताए। परिवारों को कष्ट सहना पड़ा। प्रतिष्ठा धूमिल हुई। राजनीतिक करियर को निशाना बनाया गया। यह सब विरोधियों को चुप कराने और सत्ता बरकरार रखने के भाजपा के एकमात्र एजेंडे को पूरा करने के लिए किया गया।’’
भाकपा नेता ने कहा कि यह प्रकरण ‘‘इस बात की एक याद दिलाता है कि कैसे सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों को भाजपा ने राजनीतिक प्रतिशोध का साधन बना दिया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब जांच संस्थाओं को राजनीतिक हथियारों में बदल दिया जाता है, तो केवल व्यक्तियों को ही निशाना नहीं बनाया जाता है, बल्कि लोकतंत्र को भी कठघरे में खड़ा किया जाता है। सत्ता के इस दुरुपयोग के लिए देश जवाबदेही का हकदार है।’’
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट कर दावा किया कि अदालत के फैसले से एक बार फिर से यह बात उजागर हो गई है कि मोदी सरकार जांच एजेंसियों का राजनीतिक प्रतिशोध के हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।
भाषा हक
हक दिलीप
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