मुंबई, नौ जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस-राकांपा सरकार ने महत्वाकांक्षी मिसिंग लिंक परियोजना को बंद नहीं किया था, बल्कि सुरक्षा और लागत का दोबारा आकलन करने के लिए इसे कुछ समय के लिए रोक दिया था।
कांग्रेस नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत के दौरान यह भी कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस परियोजना के लिए दिए गए ठेकों और इसकी बढ़ी हुई लागत की जांच होनी चाहिए।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर नवनिर्मित मिसिंग लिंक मार्ग पर भूस्खलन होने के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को विधानसभा में इस परियोजना का बचाव करते हुए दावा किया था कि कांग्रेस-राकांपा सरकार ने इसे रोक दिया था।
मिसिंग लिंक एक मई को यातायात के लिए खोला गया था। यह 94 किलोमीटर लंबे मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 13.3 किलोमीटर लंबा सुरंग और पुल वाला मार्ग है। इससे लोनावला-खंडाला घाट वाले हिस्से को बाईपास किया जाता है, जिसकी वजह से यात्रा की दूरी 5.7 किलोमीटर कम हो जाती है।
पृथ्वीराज चव्हाण ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि इस परियोजना की परिकल्पना उनके कार्यकाल में की गई थी और उनकी सरकार ने इसकी अवधारणा तथा व्यवहार्यता अध्ययन को मंजूरी दी थी। लेकिन परियोजना की जांच करने वाले आईआईटी के इंजीनियरों ने इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
चव्हाण ने कहा, ‘इस परियोजना का विचार हमारा था। इसकी परियोजना रिपोर्ट दिसंबर 2013 में पेश की गई थी। हमने इसे सिर्फ इसलिए कुछ समय के लिए रोका था क्योंकि हम सुरक्षा के पहलुओं से संतुष्ट नहीं थे और इसकी पूरी तरह से दोबारा समीक्षा कराना चाहते थे।”
भाषा जोहेब शोभना
शोभना