नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि समुदायों को पीछे छोड़े बिना संकटों से उबरने की क्षमता पैदा करना, जिम्मेदारी के साथ नवाचार को आगे बढ़ाना और टिकाऊपन को विकास के केंद्र में रखना महत्वपूर्ण है।
यहां आयोजित 12वें ब्रिक्स पर्यावरण मंत्री सम्मेलन में अपने मुख्य भाषण के दौरान यादव ने कहा कि समाधानों को वैज्ञानिक रूप से मजबूत, स्थानीय रूप से प्रासंगिक और सामाजिक रूप से समावेशी बनाने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को एक साथ लाने की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के नुकसान, प्रदूषण और आपदा जोखिमों की बढ़ती वैश्विक चुनौतियों को रेखांकित किया, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए जहां पर्यावरणीय संवेदनशीलता अक्सर व्यापक विकास प्राथमिकताओं से जुड़ी होती है।
उन्होंने जलवायु वित्तपोषण, अनुकूलन और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने पर जोर दिया। इसके साथ ही जंगलों की आग को रोकने, उसकी तैयारी करने, समय पर चेतावनी देने, तुरंत राहत पहुंचाने और आग के नुकसान से उबरने के लिए ब्रिक्स देशों से मिलकर काम करने का आह्वान किया।
यादव ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स ज्ञान नेटवर्क, तकनीकी आदान-प्रदान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी सहयोग और मजबूत संस्थागत साझेदारी के माध्यम से ‘सहयोग को सामूहिक और सहकार्यात्मक क्षमता में बदल सकता है।’
ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक (12वीं) मंगलवार को एक संयुक्त मंत्रिस्तरीय बयान को सर्वसम्मति से अंगीकार करने के साथ संपन्न हुई।
वक्तव्य में कहा गया, ‘हम अलग-अलग राष्ट्रीय परिस्थितियों के आलोक में समानता और ‘समान लेकिन पृथक उत्तरदायित्व एवं संबंधित क्षमताओं’ (सीबीडीआर-आरसी) के सिद्धांत को दर्शाते हुए सतत विकास के लिए 2030 के एजेंडा, यूएनएफसीसीसी और इसके पेरिस समझौते के पूर्ण व प्रभावी कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।’
इस आयोजन के दौरान ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह द्वारा तैयार किए गए ‘ज्ञान संग्रह’ भी जारी किए गए। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, ये दस्तावेज ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच अग्रणी प्रथाओं, ज्ञान प्रणालियों और नवाचारों को दर्शाते हैं।
भाषा सुमित वैभव
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