जमशेदपुर हत्याकांड में पांच और व्यक्ति गिरफ्तार, हथियार बरामद

Ads

जमशेदपुर हत्याकांड में पांच और व्यक्ति गिरफ्तार, हथियार बरामद

  •  
  • Publish Date - January 29, 2025 / 10:32 PM IST,
    Updated On - January 29, 2025 / 10:32 PM IST

जमशेदपुर, 29 फरवरी (भाषा) झारखंड के जमशेदपुर में 10 दिन पहले 35 वर्षीय एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने के मामले में कथित रूप से शामिल सात सदस्यीय गिरोह के सरगना समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से हथियार एवं गोला-बारूद भी बरामद किया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

जमशेदपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक किशोर कौशल ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि सरगना और चार अन्य को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था, जबकि दो अन्य, दिल्ली से रौनक सिंह और जमशेदपुर से निखिल सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था और 27 जनवरी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

संतोष सिंह की यहां मानगो में गुरुद्वारा रोड स्थित उनके आवास के पास मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने 19 जनवरी को गोली मारकर हत्या कर दी थी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया, ‘‘पीड़ित ने भागने की कोशिश की और वह पास के एक घर में घुस गया, लेकिन हत्यारों ने उसका पीछा कर उसे गोली मार दी।’’

एसएसपी ने बताया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए एसपी (सिटी) कुमार शिवाशीष की निगरानी में पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय-1) भोला प्रसाद सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई थी।

कौशल ने बताया कि टीम ने मुख्य आरोपी रोहित दीक्षित, शुभम कुमार और विमल गोप उर्फ ​​टकला को राष्ट्रीय राजमार्ग-33 से मंगलवार रात को गिरफ्तार कर लिया और अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियार और स्कूटर भी बरामद कर लिए।

अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने मृतक की टोह (रेकी) लगाने और हत्या की साजिश रचने के आरोप में विवेक कुमार तिवारी उर्फ ​​लखी तिवारी तथा अंकित शर्मा उर्फ ​​ब्रेटली को भी मानगो इलाके से गिरफ्तार किया है।

कौशल ने इस हत्या के मकसद के बारे में बताया, ‘‘पीड़ित (संतोष सिंह) और उसके भाई जितेंद्र सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर 11 सितंबर 2014 को रोहित के पिता पशुपति नाथ दीक्षित की हत्या कर दी थी।’’

एसएसपी ने बताया कि दोनों को पशुपति की हत्या के आरोप में जेल भी जाना पड़ा था।

जितेंद्र सिंह ने हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे।

भाषा प्रीति वैभव

वैभव