झारखंड परीक्षा प्रदर्शन: सरकार, प्रदर्शनकारियों के बीच सोमवार को फिर से होगी बातचीत

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झारखंड परीक्षा प्रदर्शन: सरकार, प्रदर्शनकारियों के बीच सोमवार को फिर से होगी बातचीत

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 12:12 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 12:12 PM IST

रांची, 17 अगस्त (भाषा) झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवार सोमवार को राज्य सरकार के साथ फिर से बातचीत करेंगे। इस आंदोलन का आज 24वां दिन है और छह प्रदर्शनकारी अब भी भूख हड़ताल पर हैं।

प्रदर्शनकारियों ने एक दिन पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव के पुतले जलाए और झामुमो-कांग्रेस गठबंधन पर उनकी मांगों के संबंध में ‘‘ठोस कार्रवाई नहीं करने’’ का आरोप लगाया।

बाद में शाम को हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शनकारियों को सोमवार अपराह्न दो बजे फिर से बातचीत के लिए बुलाया।

यह प्रस्तावित बैठक सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत का सातवां दौर होगी। पिछले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी।

यह फैसला जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शनकारियों और अनुमंडल अधिकारी तथा अतिरिक्त जिलाधिकारी (कानून-व्यवस्था) के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया।

‘जेपीएससी-जेएसएसी रिफॉर्म्स मंच’ के नेता रवींद्र पासवान ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हम बातचीत के लिए जरूर जाएंगे क्योंकि हम बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं। हम अपनी दो मांगों पर अडिग हैं – भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं को रद्द किया जाए।’’

‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (जेएसएससी-सीजीएल) को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने रविवार को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन स्थल से अल्बर्ट एक्का चौक तक मशाल जुलूस निकाला, जहां उन्होंने पुतले जलाए। कई जिलों में भी ऐसे ही प्रदर्शन हुए।

छात्रों ने सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार द्वारा उनकी मांगों पर ‘‘कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने’’ पर निराशा जताई और आरोप लगाया कि सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर राजनीति कर रही है।

प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को घोषणा की थी कि वे 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और उन्होंने पूरे झारखंड के छात्रों से इस प्रदर्शन के लिए रांची में इकट्ठा होने की अपील की।

पासवान ने आरोप लगाया, ‘‘हम मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं क्योंकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस दोनों ही हमारे साथ राजनीति कर रहे हैं।’’

प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि अगर मुख्यमंत्री उनकी चिंताओं पर कार्रवाई नहीं करते हैं तो कांग्रेस को झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए।

झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने रविवार को सोरेन से छात्रों की मांगें मानने और सीबीआई जांच की उनकी मांग का समर्थन करने का आग्रह किया।

मरांडी ने कहा, ‘‘छात्र परीक्षा में अनियमितता के मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं और मुझे लगता है कि सरकार को इसका आदेश देना चाहिए। सरकार इससे क्यों डरती है?’’

उन्होंने कहा कि सरकार की लगातार ‘‘निष्क्रियता’’ के कारण अधिक से अधिक युवा और छात्र सड़कों पर उतर सकते हैं।

मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव पर मरांडी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उन छात्रों को नैतिक समर्थन देगी जो तीन सप्ताह से अधिक समय से ‘‘शांतिपूर्ण’’ तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

कांग्रेस ने कहा कि उसकी राज्य इकाई 18 अगस्त को होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करेगी।

कांग्रेस की झारखंड इकाई के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा, ‘‘झारखंड के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि पार्टी छात्रों की चिंताओं को उठाएगी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समय-सीमा तय करने की मांग करेगी।

प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों का समर्थन तो किया लेकिन इसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

झारखंड सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उपायों की घोषणा करके प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है।

सरकार की ओर से बताए गए उपायों में समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, प्रौद्योगिकी से सुरक्षित परीक्षाएं, उत्तर कुंजी और ओएमआर शीट का समय पर प्रकाशन तथा भर्ती प्रक्रिया में कई स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है।

सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और अभिभावकों से सुझाव लेने के लिए एक अभियान भी शुरू किया है।

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा