कर्नाटक: विपक्ष ने मंत्री नागेंद्र को हटाने की मांग को लेकर विधानसभा की कार्यवाही बाधित की

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कर्नाटक: विपक्ष ने मंत्री नागेंद्र को हटाने की मांग को लेकर विधानसभा की कार्यवाही बाधित की

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  • Publish Date - August 19, 2026 / 07:44 PM IST,
    Updated On - August 19, 2026 / 07:44 PM IST

बेंगलुरु, 19 अगस्त (भाषा) कर्नाटक विधानसभा की कार्यवाही बुधवार को लगातार तीसरे दिन बाधित रही। विपक्ष ने राज्य के एक निगम में करोड़ों रुपये के कथित गबन के मामले में आरोपों का सामना कर रहे मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर सदन में हंगामा किया।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बी. सी. नागेश को श्रद्धांजलि दिए जाने के तुरंत बाद विपक्षी भाजपा और जद (एस) ने यह मुद्दा उठाया और नागेंद्र को तत्काल मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की। नागेश का मंगलवार को निधन हो गया था।

नागेंद्र को तीन अगस्त को डी. के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। वह अभी योजना और सांख्यिकी विभाग संभाल रहे हैं।

विपक्ष की नारेबाजी के बीच उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने नागेंद्र को मंत्रिमंडल में बनाए रखने के सरकार के फैसले का बचाव करते हुए बयान दिया।

उन्होंने इस मुद्दे को लेकर विपक्ष के विरोध की आलोचना भी की।

परमेश्वर ने कहा, ‘विपक्षी दल नागेंद्र पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं और सदन के सुचारू कामकाज में बाधा डाल रहे हैं। हम यह सत्र करदाताओं के पैसे से चला रहे हैं। विधायी सत्रों में राज्य के लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों की झलक मिलनी चाहिए। राजनीतिक कारणों से इस तरह का व्यवधान पैदा करना जनता और संविधान, दोनों को हानि पहुंचाने वाला है।’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए, सरकार विपक्ष के सदस्यों से अनुरोध करती है कि वे सदन की कार्यवाही में बाधा न डालें, बल्कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए और बहस में भाग लेकर संविधान की भावना को बनाए रखें।’

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआती तौर पर ऐसा लगता है कि बैंक और निगम के अधिकारियों ने मिलीभगत करके 84.63 करोड़ रुपये गैर-कानूनी तरीके से हस्तांतरित किए। इस रकम में से लगभग 79.68 करोड़ रुपये नकद और चल संपत्ति/आभूषण के रूप में पहले ही वसूल किए जा चुके हैं और बाकी रकम की वसूली की प्रक्रिया भी चल रही है।

उन्होंने कहा कि भले ही ईडी और सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में नागेंद्र का नाम शामिल किया है, लेकिन अदालतों ने निर्देश दिया है कि उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाए। ‘किसी भी अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है। इन सभी हालात को देखते हुए, विपक्ष की ओर से जिद पर अड़ कर किया जा रहा विरोध संसदीय व्यवस्था का अपमान है।’

इस बीच, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एमजी रोड शाखा के प्रबंधक की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सीबीआई ने तीन जून को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की।

नारेबाजी और हंगामे के बीच परमेश्वर द्वारा बयान पढ़े जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष जी. एस. पाटिल ने सदन की कार्यवाही भोजनावकाश तक के लिए स्थगित कर दी।

दोपहर के भोजन के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने पर विपक्षी सदस्यों ने हाथों में तख्तियां लेकर अपना विरोध जारी रखा। इसके बाद अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू कराया, जिसमें कुछ कांग्रेस विधायकों ने मंत्रियों से अपने सवालों के जवाब मांगे। हालांकि, हंगामा जारी रहने के कारण अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही फिर कुछ समय के लिए स्थगित कर दी।

जब सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो हंगामा बढ़ गया क्योंकि कुछ कांग्रेस सदस्य भी विपक्ष और उसके नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

शोर-शराबे के बीच अध्यक्ष ने एक विधेयक और एक रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखने की अनुमति दी, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्षी दल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि यदि मंत्री को बर्खास्त नहीं किया गया तो वे मानसून सत्र की कार्यवाही नहीं चलने देंगे।

मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मंगलवार को नागेंद्र के इस्तीफे की विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया और इस मुद्दे पर उनके विरोध व विधानसभा की कार्यवाही में बाधा डालने को राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए किया गया ‘नाटक’ करार दिया।

उन्होंने नागेंद्र को मंत्रिमंडल में शामिल करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि कथित घोटाले में उनकी कोई संलिप्तता नहीं है।

भाषा

शुभम अविनाश

अविनाश