बेंगलुरु, 15 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई ने बुधवार को राज्यपाल थावरचंद गहलोत को ज्ञापन सौंपकर प्रदेश सरकार की स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) संबंधी अधिसूचना को तुरंत वापस लेने और इस मामले में उचित संवैधानिक हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।
पार्टी ने कहा कि इस अधिसूचना से राज्य के हितों, भारत के संघीय ढांचे के सिद्धांतों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने हाल ही में घोषणा की थी कि राज्य सरकार पात्र नागरिकों को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी करेगी, ताकि वे राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा कर सकें।
इसके बाद राज्य के राजस्व विभाग ने स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) जारी करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।
दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यह प्रमाणपत्र कर्नाटक में स्थायी निवास का प्रमाण होगा।
नागरिक स्थायी निवास प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं।
भाजपा ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा, “कर्नाटक सरकार की ओर से 26 जून, 2026 को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी करने संबंधी अधिसूचना राज्य के हितों, संघीय ढांचे के सिद्धांतों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर डाल सकती है। इसलिए हम संविधान के संरक्षक के रूप में आपसे आग्रह करते हैं कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और उचित निर्देश जारी करें।”
राज्यपाल से मिलने वाले भाजपा प्रतिनिधिमंडल में विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, विधान परिषद में विपक्ष के नेता सी नारायणस्वामी, विधान परिषद सदस्य एन. रवि कुमार और सी. टी. रवि सहित अन्य नेता शामिल थे।
भाजपा ने कहा कि विदेशियों की पहचान, नागरिकता, भारत में विदेशियों के प्रवेश और आव्रजन से जुड़े मामले संविधान की संघ सूची के तहत केवल केंद्र सरकार के विधायी व कार्यकारी अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
पार्टी ने इसी आधार पर दलील दी कि राज्य सरकार के पास ‘स्थायी निवासी’ की नई श्रेणी बनाने का न तो संवैधानिक अधिकार है और न ही कानूनी अधिकार।
भाषा जितेंद्र मनीषा
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