कर्नाटक के राज्यपाल ने विधानमंडल के संयुक्त सत्र में दो पंक्तियां पढ़कर संबोधन समाप्त किया

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कर्नाटक के राज्यपाल ने विधानमंडल के संयुक्त सत्र में दो पंक्तियां पढ़कर संबोधन समाप्त किया

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  • Publish Date - January 22, 2026 / 12:09 PM IST,
    Updated On - January 22, 2026 / 12:09 PM IST

बेंगलुरु, 22 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बृहस्पतिवार को यहां राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र में अपना परंपरागत संबोधन केवल दो शुरुआती पंक्तियां पढ़कर समाप्त कर दिया।

राज्यपाल ने सदस्यों का अभिवादन करने के बाद कहा कि उन्हें संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए प्रसन्नता हो रही है।

उन्होंने हिंदी में कहा, ‘‘मेरी सरकार राज्य के आर्थिक, सामाजिक एवं भौतिक विकास को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। जय हिंद, जय कर्नाटक।’’

राज्यपाल द्वारा अपने भाषण को छोटा किए जाने पर कांग्रेस सदस्यों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और सदन में इसके खिलाफ नारे लगाए।

लोक भवन और कांग्रेस नीत राज्य सरकार के बीच जारी तनावपूर्ण गतिरोध के बीच यह घटनाक्रम हुआ। यह गैर-भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) शासित राज्यों में राज्यपाल और सरकारों के टकराव की ताजा घटना है।

इससे पहले, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, विधानसभा अध्यक्ष यू. टी. खादर, विधान परिषद के सभापति बसवराज होराट्टी और विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल ने राज्य सचिवालय की सीढ़ियों पर गहलोत का स्वागत किया।

गहलोत ने राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से बुधवार को इनकार कर दिया था। राज्यपाल के इस फैसले के परिणामस्वरूप सरकार की नीतियों की रूपरेखा प्रस्तुत करने वाले पारंपरिक भाषण के भविष्य को लेकर गतिरोध उत्पन्न हो गया।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को रद्द करने और निधियों के हस्तांतरण से संबंधित मुद्दों पर कुल 11 पैराग्राफ हैं जिनसे राज्यपाल नाराज हो गए हैं और वे इन्हें हटवाना चाहते हैं।

गतिरोध के बीच राज्य के मंत्री एच के पाटिल ने बुधवार को गहलोत से मुलाकात की थी।

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा