कर्नाटक के राज्यपाल ने 22 जनवरी को विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार किया

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कर्नाटक के राज्यपाल ने 22 जनवरी को विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार किया

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  • Publish Date - January 22, 2026 / 12:49 AM IST,
    Updated On - January 22, 2026 / 12:49 AM IST

बेंगलुरु, 21 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 22 जनवरी को राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

राज्यपाल के इस फैसले के परिणामस्वरूप सरकार की नीतियों की रूपरेखा प्रस्तुत करने वाले पारंपरिक भाषण के भविष्य को लेकर गतिरोध उत्पन्न हो गया।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में मनरेगा को रद्द करने और निधियों के हस्तांतरण से संबंधित मुद्दों पर कुल 11 अनुच्छेद हैं, जिनसे राज्यपाल नाराज हो गए हैं और वे इन्हें हटवाना चाहते हैं।

गतिरोध के बीच राज्य के मंत्री एच के पाटिल ने बुधवार को गहलोत से मुलाकात की, लेकिन कोई प्रगति होती नजर नहीं आई।

इससे एक दिन पहले कर्नाटक की ही तरह गैर भाजपा शासित केरल और तमिलनाडु के राज्यपालों के विधानसभा में दिए गए अभिभाषणों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।

लोक भवन में प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री पाटिल के अनुसार, राज्यपाल को अपने संबोधन के लगभग 11 अनुच्छेदों पर आपत्ति है, जिनमें केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को निरस्त करने के निर्णय के विरोध वाले अनुच्छेद भी शामिल हैं।

पाटिल ने कहा कि राज्यपाल चाहते हैं कि इन अनुच्छेदों को पूरी तरह से हटा दिया जाए, जो सरकार को स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल के साथ हुई चर्चा के बारे में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को सूचित किया जाएगा और सरकार द्वारा लिया गया अंतिम निर्णय लोक भवन को बताया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, बुधवार देर रात राज्य सरकार ‘वीबी – जी राम जी’ अधिनियम की आलोचना करने वाले केवल कुछ वाक्यों को हटाने पर सहमत हुई है।

पिछले दो दिन में यह तीसरी बार है जब किसी राज्य के राज्यपाल ने अभिभाषण देने से इनकार कर दिया है।

इसी तरह, तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि मंगलवार को वर्ष के पहले सत्र के पहले दिन यह कहते हुए विधानसभा में अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही सदन से बाहर चले गए थे कि अभिभाषण के पाठ में ‘गलतियां’ थीं।

इसी प्रकार, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने अपने भाषण के कुछ हिस्सों को “छोड़” दिया था, जबकि लोक भवन का दावा है कि राज्यपाल के सुझावों को अभिभाषण के मूल मसौदे से हटा दिया गया था।

कर्नाटक विधानसभा का संयुक्त सत्र 22 जनवरी को शुरू होगा। केंद्र द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को ‘‘रद्द’’ करने समेत कई मुद्दों पर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा-जद(एस) गठबंधन के बीच टकराव की संभावना के चलते सत्र के हंगामेदार रहने का अनुमान है।

बाईस से 31 जनवरी तक चलने वाले इस सत्र की शुरुआत बृहस्पतिवार को राज्यपाल गहलोत के परंपरागत अभिभाषण से होनी थी।

सत्तारूढ़ कांग्रेस केंद्र में भाजपा-नीत राजग सरकार के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करने की योजना बना रही है, जिसमें मनरेगा को रद्द करने पर आपत्ति जताते हुए इसे बहाल करने की मांग की जाएगी। साथ ही नए विकसित भारत-रोजगार आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम को रद्द करने की भी मांग की जाएगी।

भाषा शफीक देवेंद्र

देवेंद्र