करूर भगदड़: टीवीके नेताओं के बयानों पर रोक लगाने के अनुरोध को लेकर द्रमुक ने न्यायालय का रुख किया

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करूर भगदड़: टीवीके नेताओं के बयानों पर रोक लगाने के अनुरोध को लेकर द्रमुक ने न्यायालय का रुख किया

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  • Publish Date - July 3, 2026 / 05:55 PM IST,
    Updated On - July 3, 2026 / 05:55 PM IST

नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय समेत तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के नेताओं की करूर भगदड़ के संबंध में सार्वजनिक रूप से बयानबाजी पर रोक लगाये जाने का अनुरोध किया गया है।

करूर में भगदड़ की घटना में 41 लोगों की मौत हो गई थी।

द्रमुक के संगठन सचिव आर एस भारती ने याचिका दायर कर लंबित मामले में स्वयं को पक्षकार बनाये जाने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है कि इस मामले में जिन कई लोगों के खिलाफ शुरू में आरोपपत्र दायर किया गया था, वे 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद अब तमिलनाडु मंत्रिमंडल में मंत्री हैं।

याचिका में तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन द्वारा बृहस्पतिवार को दिए गए एक सार्वजनिक बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि करूर घटना को लेकर ‘‘हिसाब चुकता करना’’ बाकी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि द्रमुक की पिछली सरकार ने पुलिस के जरिये करूर में लोगों की ‘‘हत्या’’ की थी।

याचिका में अनुरोध किया गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया जाए कि वह अर्जुन द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों के संबंध में शिकायत दर्ज कर ‘‘गवाहों को प्रभावित करने, सबूतों से छेड़छाड़ करने तथा जांच में बाधा डालने के आरोपों में कार्रवाई करे।’’

भारती ने दावा किया कि मुख्यमंत्री विजय 10 जुलाई को करूर जाने वाले हैं, जहां वह भगदड़ की घटना के पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात करेंगे और अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के आदेश समेत सरकार की ओर से दी जाने वाली विभिन्न सहायता सौंपेंगे।

याचिका में कहा गया है, ‘‘जांच अभी लंबित है और तब यदि उस मामले से जुड़े लोग या सरकार के मंत्री/नेता गवाहों से सीधे मिलते हैं, खासकर जब वे उसी घटना से जुड़ी सहायता बांट रहे हों, तो इससे जांच निष्पक्ष रहने के बारे में आशंका पैदा होती है।’’

शीर्ष अदालत ने पहले करूर भगदड़ की जांच सीबीआई को सौंपते हुए कहा था कि यह घटना अंतरात्मा को झकझोर देने वाली है और इसके लिए निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच आवश्यक है।

भाषा

देवेंद्र माधव

माधव

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