तिरुवनंतपुरम, 28 फरवरी (भाषा) केरल के तिरुवनंतपुरम की एक विशेष अदालत ने शनिवार को एक मंदिर के पूर्व पुजारी को बुरी आत्माओं को भगाने के बहाने 14 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
तिरुवनंतपुरम अतिरिक्त सत्र न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम मामले) के न्यायाधीश शिबू एमपी ने एर्नाकुलम जिले के मूथाकुन्नम निवासी 45 वर्षीय बिनेश को दोषी पाया और उस पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
बिनेश पूर्व में कन्नामूला बालसुब्रमण्य मंदिर में पुजारी था।
अदालत ने बिनेश को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और तत्कालीन भारतीय दंड संहिता के तहत दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई और आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अदालत ने दोषी पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने जिला विधि सेवा प्राधिकरण को पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़िता को आर्थिक मुआवजा देने का निर्देश दिया।
यह घटना 2019 में तब की है, जब पीड़िता की मां ने बिनेश से मदद मांगी क्योंकि उनकी बेटी स्कूल की परीक्षाओं को लेकर बहुत चिंतित रहती थी।
बिनेश ने स्थिति का फायदा उठाते हुए मां को यह कहकर बहलाया कि उनकी बेटी पर भूत-प्रेत का साया है और उसे विशेष अनुष्ठानों की आवश्यकता है।
इसी बहाने आरोपी, नाबालिग को एक कमरे में ले गया और कई दिनों तक उसका कई बार यौन उत्पीड़न किया।
बच्ची की परेशानी कम न होने पर माता-पिता उसे मानसिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जिसके बाद इस घटना का खुलासा हुआ।
परामर्शदाताओं के साथ एक सत्र के दौरान पीड़िता ने आपबीती का खुलासा किया, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
लोक अभियोजक कट्टैकोनम अजीत प्रसाद और अधिवक्ता बिंदू वीसी ने मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए आरोपी के खिलाफ मामला पेश किया और सबूतों का ब्यौरा दिया।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के 17 गवाहों और बचाव पक्ष के पांच गवाहों से पूछताछ की गई।
भाषा जितेंद्र पवनेश
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