कोच्चि, 28 अप्रैल (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कन्नूर डेंटल कॉलेज के छात्र नितिन राज की मौत के प्रकरण में न्याय की मांग करते हुए विभिन्न दलित संगठनों द्वारा बुलाई गई राज्यव्यापी हड़ताल के दौरान हुई हिंसा के संबंध में स्वत:संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई की।
अदालत ने हड़ताल का आह्वान करने वालों को भी नोटिस जारी किया और राज्य पुलिस प्रमुख को शाम तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति बसंत बालाजी और न्यायमूर्ति पी. कृष्ण कुमार की अवकाशकालीन पीठ ने इस मामले पर विचार किया। अदालत को खबरों के माध्यम से पता चला था कि विरोध प्रदर्शन ने केरल भर के लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित किया है।
‘वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम’ (वीआईटीईईई) में बैठने वाले छात्र और साथ ही अस्पतालों की ओर जा रहे लोग भी यातायात में फंस गए।
अदालत ने अपने पूर्व के कई निर्णयों में यह माना है कि हड़तालों के दौरान जनता या सरकार को होने वाली कोई भी हानि या क्षति अवैध और असंवैधानिक है, और इसके परिणामस्वरूप अवमानना की कार्यवाही हो सकती है।
सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक चले इस विरोध प्रदर्शन ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने वाहनों को रोककर दुकानों को बंद करने पर मजबूर कर दिया।
‘जस्टिस फॉर नितिन राज एक्शन काउंसिल’ समेत करीब 52 दलित संगठनों ने हड़ताल का आह्वान किया था।
हड़ताल की घोषणा करते हुए इन संगठनों ने कहा था कि आवश्यक सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी और वाहनों को जबरन नहीं रोका जाएगा।
हालांकि, विभिन्न जिलों से उल्लंघन की घटनाएं सामने आईं।
कन्नूर के अंचराकंडी स्थित एक निजी डेंटल कॉलेज में बीडीएस प्रथम वर्ष के छात्र राज 10 अप्रैल को एक इमारत से गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल पाए गए। बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
उनके परिवार द्वारा जाति और रंग के आधार पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करने के बाद, पुलिस ने दो संकाय सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
भाषा प्रशांत दिलीप
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