कोझिकोड (केरल), 26 मई (भाषा) सर्जरी के दौरान पेट में कथित तौर पर कैंची छूट जाने के मामले में वर्षों तक न्याय की लड़ाई लड़ने वाली हर्षिना ने मंगलवार को यहां सरकारी मेडिकल कॉलेज में कार्यालय परिचारक के रूप में कार्यभार संभाल लिया।
नई संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद हर्षिना को इसी मेडिकल कॉलेज में स्थायी नौकरी देने का फैसला किया था।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के मुरलीधरन ने सोमवार को उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा।
हर्षिना अपने परिजनों और आंदोलन समिति के नेताओं के साथ मेडिकल कॉलेज पहुंचीं और कार्यभार संभालने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए भावुक हो गईं।
हर्षिना ने कहा कि यह नियुक्ति वर्षों की कठिनाई और न्याय के लिए किए गए संघर्ष का परिणाम है।
उन्होंने पूर्व वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन अधिकारियों ने साथ देने का दावा करने के बावजूद हर्षिना के मामले की अनदेखी की और उनका मजाक उड़ाया।
उन्होंने कहा, “यह उन पूर्व अधिकारियों को करारा जवाब है, जिन्होंने हमारे साथ होने की बात कहते हुए भी हमें दरकिनार किया और अपमानित किया।”
हर्षिना ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने उनसे किया वादा पूरा किया है और उन्हें अब भी वही अपनापन और समर्थन मिला है, जैसा विपक्ष के नेता रहने के दौरान मिला था।
उन्होंने कहा कि अब उन्हें स्वास्थ्य मंत्री का भी समर्थन मिल रहा है और वर्षों की पीड़ा के बाद आखिरकार सच की जीत हुई है।
हर्षिना ने कहा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अदालत कार्यवाही जारी रहेगी।
कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज में 2017 में हुई एक सर्जरी के दौरान हर्षिना के पेट में कथित तौर पर कैंची छूट गई थी, जिसे 2022 में दूसरी सर्जरी के जरिए निकाला गया।
इसके बाद से हर्षिना न्याय और उचित मुआवजे की मांग को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं।
भाषा
राखी माधव
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