LPG Crisis in India: सिलेंडर संकट के बीच देशवासियों के लिए अच्छी खबर, भारत पहुंचने वाली है LPG की बड़ी खेप, काम आई मोदी सरकार की ये नीति

सिलेंडर संकट के बीच देशवासियों के अच्छी खबर, भारत पहुंचने वाली LPG की बड़ी खेप, Large Consignment of LPG Reaches India

LPG Crisis in India: सिलेंडर संकट के बीच देशवासियों के लिए अच्छी खबर, भारत पहुंचने वाली  है LPG की बड़ी खेप, काम आई मोदी सरकार की ये नीति

LPG Crisis in India:

Modified Date: March 14, 2026 / 11:58 pm IST
Published Date: March 14, 2026 8:21 pm IST

नई दिल्ली: LPG Crisis in India: खाड़ी देशों से एलपीजी लेकर आ रहे दो भारतीय जहाजों ने शनिवार सुबह युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर लिया। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने वाले भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या तीन हो गई है। जहाजरानी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में बचे हुए 22 जहाज प्रतीक्षा में हैं, क्योंकि भारत सरकार उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र की सरकारों के साथ बातचीत कर रही है। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि एलपीजी ला रहे जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ अब गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।

LPG Crisis in India: उन्होंने बताया कि ये जहाज 92,700 टन एलपीजी ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिवालिक के 16 मार्च को मुंद्रा जबकि नंदा देवी पोत के 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है। भारतीय ध्वज वाले जहाजों की निकासी भारतीय कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होने के साथ-साथ ये इस मायने में भी अहम है कि रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। भारत अपनी एलपीजी आवश्यकताओं का 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से 85-90 प्रतिशत सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों से प्राप्त होता है। ये देश तेल और गैस के परिवहन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण मार्च के पहले सप्ताह से यह जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है।

सिन्हा ने कहा कि पश्चिमी हिस्से में बचे भारतीय ध्वज वाले 22 जहाजों में से छह एलपीजी पोत हैं, एक द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) वाहक है, चार कच्चे तेल के टैंकर हैं, एक रासायनिक उत्पादों की ढुलाई कर रहा है और तीन कंटेनर जहाज हैं और दो ‘बल्क कैरियर’ हैं। उन्होंने बताया कि बाकी बचे जहाजों में से एक खाली है, जिस पर कोई माल नहीं है जबकि तीन जहाज ‘ड्राई डॉक’ यानी नियमित रखरखाव के लिए हैं। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘हमारे कई जहाज खाड़ी क्षेत्र में प्रतीक्षा में हैं। हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के मद्देनजर सभी संबंधित देशों के साथ संपर्क और समन्वय बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं ताकि उनके लिए सुरक्षित एवं निर्बाध पारगमन सुनिश्चित किया जा सके।’’

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