मध्यप्रदेश: मुस्लिम समुदाय ने भोजशाला के पास निर्धारित स्थल पर नमाज अदा की

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मध्यप्रदेश: मुस्लिम समुदाय ने भोजशाला के पास निर्धारित स्थल पर नमाज अदा की

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  • Publish Date - July 31, 2026 / 03:27 PM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 03:27 PM IST

धार (मध्यप्रदेश), 31 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय की अनुमति के बाद मध्यप्रदेश के धार जिले में शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भोजशाला-कमाल मौला परिसर के निकट स्थित एक स्थान पर जुमे की नमाज अदा की।

भोजशाला के निकट स्थित सर्वे क्रमांक 612 पर नमाज की व्यवस्था की गई। इस स्थान का चयन जिला प्रशासन के साथ हुई बैठक में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने किया था।

मई में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किए जाने के बाद पहली बार बड़ी संख्या में मुस्लिम श्रद्धालु जुमे की नमाज के लिए यहां पहुंचे।

अधिकारियों ने बताया कि नमाज के लिए प्रशासन ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की थीं।

इससे पहले, धार के जिलाधिकारी राजीव रंजन मीणा ने संवाददाताओं से कहा था कि नमाज के लिए सभी जरूरी प्रशासनिक इंतजाम किए जा रहे हैं।

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मुस्लिम समुदाय को 11वीं शताब्दी के भोजशाला परिसर से सटे दरगाह परिसर में जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति दी थी। न्यायालय ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि शुक्रवार को दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच मुस्लिम समुदाय को वहां नमाज अदा करने की अनुमति सुनिश्चित की जाए।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने मई में अपने फैसले में भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर करार देते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि 11वीं शताब्दी के इस स्मारक का धार्मिक स्वरूप वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर स्थापित हो चुका है। हालांकि, उसने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए जिले में अलग भूमि आवंटित कराने के लिए राज्य सरकार से संपर्क करने की स्वतंत्रता भी दी थी।

इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया। न्यायालय ने बृहस्पतिवार को विवादित भोजशाला परिसर से सटे दरगाह परिसर में जुमे की नमाज की अनुमति दी, जिसके बाद समुदाय के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन ने सर्वे क्रमांक 612 का चयन किया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि उसके इस अंतरिम निर्देश से राज्य सरकार और मुस्लिम पक्ष आपसी सहमति से जुमे की नमाज के लिए किसी वैकल्पिक स्थान की तलाश करने से वंचित नहीं होंगे।

भाषा सं दिमो आशीष

आशीष