मजिस्ट्रेट ने युवा कांग्रेस प्रमुख चिब को जमानत दी, सत्र अदालत ने रोक लगायी

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मजिस्ट्रेट ने युवा कांग्रेस प्रमुख चिब को जमानत दी, सत्र अदालत ने रोक लगायी

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  • Publish Date - February 28, 2026 / 09:03 PM IST,
    Updated On - February 28, 2026 / 09:03 PM IST

नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब को यहां ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में हुए विरोध प्रदर्शन के संबंध में दी गई जमानत पर रोक लगा दी। यह रोक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा उन्हें यह कहते हुए राहत दिए जाने के कुछ घंटे बाद लगाई गई कि ‘‘जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय संविधान की आत्मा है।’’

ड्यूटी मजिस्ट्रेट वंशिका मेहता के जमानत आदेश को दिल्ली पुलिस द्वारा चुनौती देने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित बंसल ने स्थगन आदेश जारी किया और मामले को 6 मार्च को आगे की कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया।

चिब को उनकी चार दिन की पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद शुक्रवार देर रात करीब एक बजे ड्यूटी मजिस्ट्रेट वंशिका मेहता के समक्ष उनके सरकारी आवास में पेश किया गया। अदालत ने 24 फरवरी को चिब को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था।

दिल्ली पुलिस ने यह दलील देते हुए चिब की हिरासत और तीन दिन बढ़ाने की अपील की थी कि दो सह-आरोपियों के ठिकाने का पता लगाने के लिए आगे की पूछताछ आवश्यक है।

अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि ‘‘जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय संविधान की आत्मा है।’’ अदालत ने कहा कि स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए, एक ठोस स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए, या यह साबित करने के लिए सबूत पेश किए जाने चाहिए कि हिरासत से इनकार करने से न्याय की प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

अदालत ने हाथ से लिखे आदेश में यह भी कहा कि जांच अधिकारी (आईओ), चिब को और तीन दिनों तक पुलिस हिरासत में रखने के लिए ठोस कारण नहीं बता पाए।

अदालत ने कहा, ‘‘दोषी होना या न होना मुकदमे का विषय है और कानून इस मामले में अपना फैसला सुनाने की प्रक्रिया अपनाता है। हालांकि, महत्वपूर्ण यह है कि क्या इस स्तर पर आरोपी की हिरासत आवश्यक है। आरोपी की समाज में मजबूत पकड़ है, इसलिए उसके फरार होने का खतरा नहीं है।

मजिस्ट्रेट ने कहा कि ‘‘किसी भी व्यक्ति को मात्र अनुमानों के आधार पर उसकी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा’’ और दोहराया कि ‘‘जमानत एक नियम है और कारावास एक अपवाद।’’

अदालत ने आईवाईसी अध्यक्ष को 50,000 रुपये का मुचलका जमा करने साथ ही अपना पासपोर्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा करने का निर्देश भी दिया। बाद में अदालत ने आईवाईसी प्रमुख द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और बॉण्ड के सत्यापन का आदेश दिया और कहा कि वह रविवार सुबह तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे।

हालांकि, पुलिस द्वारा जमानत आदेश को चुनौती दिए जाने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित बंसल ने जमानत आदेश पर रोक लगाने का निर्देश दिया।

अदालत ने 24 फरवरी को चिब को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। उनसे भारत मंडपम में हुए प्रदर्शन में उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ की जानी थी जब भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों ने एआई सम्मेलन में अपनी कमीज उतारकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने कमीजों के नीचे ऐसी टी-शर्ट पहन रखी थीं, जिन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी-नीत केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लिखे थे।

यह शिखर सम्मेलन 16 फरवरी से शुरू हुआ था, जिसमें टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज, उद्योग जगत के नेता और नीति-निर्माता बड़ी संख्या में पहुंचे थे।

प्रदर्शनकारियों की कार्यक्रम स्थल पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर झड़पें भी हुई थीं।

भाषा अमित माधव

माधव