मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना तृणमूल का ‘महा जंगलराज’ : मोदी

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मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना तृणमूल का ‘महा जंगलराज’ : मोदी

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  • Publish Date - April 5, 2026 / 10:09 PM IST,
    Updated On - April 5, 2026 / 10:09 PM IST

कोलकाता, पांच अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों का घेराव किये जाने को लेकर पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचार रणनीति का रविवार को केंद्र बिंदु बनाते हुए इस घटना को तृणमूल कांग्रेस का ‘‘महा जंगलराज’’ करार दिया।

उन्होंने 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा फैलाए गए ‘भय’ और भाजपा के ‘भरोसे’ के बीच सीधा मुकाबला बताया।

मोदी ने पिछले महीने चुनाव की घोषणा होने के बाद, उत्तर बंगाल के कूचबिहार जिले में अपनी पहली चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मालदा घटना का इस्तेमाल भाजपा के दोहरे चुनावी मुद्दों – ‘‘बिगड़ती कानून व्यवस्था’’ और कथित जनसांख्यिकीय परिवर्तन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया।

उन्होंने कथित जनसांख्यिकीय परिवर्तन का हवाला देते हुए संदेशखालि मामला, बांग्लादेश से घुसपैठ, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी का उल्लेख करते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला।

मोदी ने विधानसभा चुनाव को राज्य के भविष्य के लिए एक निर्णायक लड़ाई के रूप में पेश किया और चेतावनी दी कि 4 मई के बाद कानून का शासन लागू होने पर, तृणमूल कांग्रेस के गुंडों के कथित अत्याचारों का ‘चुन चुन के हिसाब होगा।’’

उन्होंने कहा कि यह क्रूर सरकार प्रतिदिन बंगाल की पवित्र भूमि को रक्तरंजित कर रही है और इसे किसी भी संवैधानिक संस्था की परवाह नहीं है।

मोदी ने कहा, ‘‘दो या तीन दिन पहले, पूरे देश ने देखा है कि मालदा में न्यायिक अधिकारियों का कैसे घेराव किया गया। यह किस तरह की सरकार है? यह किस तरह की व्यवस्था है जिसमें जज और संवैधानिक प्रक्रिया भी सुरक्षित नहीं है? हम ऐसी सरकार से बंगाल की जनता की सुरक्षा की उम्मीद नहीं कर सकते।’’

प्रधानमंत्री बुधवार रात मालदा के कालियाचक-2 ब्लॉक कार्यालय में हुई घटना का उल्लेख कर रहे थे, जहां मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची के मसौदे में ‘विचाराधीन’ के रूप में चिह्नित नामों पर सुनवाई के दौरान भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों का कई घंटों तक घेराव किया था।

मोदी ने कहा, ‘‘मालदा में जो कुछ हुआ, वह केवल तृणमूल कांग्रेस का अहंकार नहीं था। यह इस क्रूर तृणमूल सरकार द्वारा प्रायोजित ‘महा जंगलराज’ था। जब भी न्याय का शिकंजा तृणमूल कांग्रेस पर कसता है, वह संवैधानिक संस्थाओं का गला घोंटने की कोशिश करती है।’’

उन्होंने दावा किया कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि उच्चतम न्यायालय को भी हस्तक्षेप करना पड़ा, और सत्तारूढ़ दल पर बंगाल में ‘कानून-व्यवस्था का जनाजा निकालने’ का आरोप लगाया।

मोदी ने कहा, ‘‘एक तरफ तृणमूल कांग्रेस का ‘भय’ है और दूसरी तरफ आपके पास भाजपा का ‘भरोसा’ है। एक तरफ तृणमूल के ‘कटमनी’ और भ्रष्टाचार का भय है और दूसरी तरफ भाजपा है, जो विकास को गति देती है।’’

प्रधानमंत्री ने बंगाल में घुसपैठ और विदेशियों के बसने के भय की तुलना घुसपैठ रोकने और घुसपैठियों को बाहर निकालने के भाजपा के भरोसे से की। उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ बदलती जनसांख्यिकी के कारण अपनी ही धरती पर आजादी खोने का भय है। दूसरी तरफ भाजपा का अपनी ही धरती पर गर्व से सिर ऊंचा करके जीने का भरोसा है।’’

सीमावर्ती जिलों में हिंदू शरणार्थी और मतुआ वोटों को एकजुट करने की कोशिश में, मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर घुसपैठियों को संरक्षण देने के लिए एसआईआर और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का विरोध करने का आरोप लगाया।

मोदी ने आरोप लगाया, ‘‘तृणमूल कांग्रेस घुसपैठियों को संरक्षण देने के लिए एसआईआर और सीएए का विरोध कर रही है। तृणमूल नहीं चाहती कि हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता मिले, इसीलिए वह सीएए का विरोध कर रही है। तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्ष के शासन में बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में खतरनाक जनसांख्यिकीय परिवर्तन हुआ है। इन घुसपैठियों को तृणमूल कांग्रेस के सिंडिकेट से सीधा संरक्षण मिल रहा है। तुष्टीकरण की राजनीति के इस खेल में बंगाल की पहचान बदली जा रही है।’’

उन्होंने कहा कि बंगाल की पहचान बदलने की कोशिश करने वालों को इस बार सत्ता से बेदखल किया जाएगा। उन्होंने तृणमूल पर राज्य की सांस्कृतिक शब्दावली को बदलने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘आपने देखा ही होगा कि तृणमूल कांग्रेस ने हाल में अपना घोषणापत्र जारी किया है। उन्होंने इसे बांग्ला नाम तक नहीं दिया। इसके बजाय, वे इसे ‘इश्तिहार’ कह रहे हैं। सोचिए, वे बंगाल की पहचान को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।’’

मोदी ने अविभाजित बंगाल में 1905 के सांप्रदायिक दंगों से पहले जारी किए गए “लाल इश्तिहार” का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी “तुष्टीकरण का खतरनाक खेल” खेल रही है।

मोदी ने वादा किया कि 4 मई को जब चुनाव परिणाम घोषित होंगे, उसके बाद तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार और हिंसा के हर कथित मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘चार मई के बाद कानून अपना काम करेगा। उनके हर गुनाह का हिसाब होगा। चुन-चुन कर हिसाब होगा। अपराधी चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, इस बार न्याय जरूर होगा।’’

अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए मोदी ने कहा कि बंगाल, जो कभी भारत के सबसे विकसित राज्यों में से एक था, कांग्रेस, वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस की लगातार सरकारों के शासनकाल में निरंतर पतन की ओर बढ़ा। उन्होंने कहा, “पहले कांग्रेस का, फिर वामपंथियों का और अब तृणमूल कांग्रेस का। बंगाल का विकास लगातार फीका पड़ता जा रहा है।’’

मोदी ने आरोप लगाया, ‘‘पहले बंगाल के लोग राष्ट्रीय औसत से अधिक कमाते थे। आज उनकी आय राष्ट्रीय औसत से कम है। अन्य राज्य आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल को पीछे धकेल दिया है। कारखाने बंगाल छोड़कर जा रहे हैं। पहले लोग यहां रोजगार के लिए आते थे। इस सरकार ने बंगाल को पलायन का केंद्र बना दिया है।’’

उन्होंने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) भर्ती घोटाले को लेकर भी सत्तारूढ़ पार्टी पर हमला किया और कहा कि रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के खुले खेल में बंगाल के युवाओं का भविष्य बर्बाद हो गया है, क्योंकि सरकारी नौकरियां तृणमूल कांग्रेस सिंडिकेट के नियंत्रण में हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मतदान के दिन तृणमूल के गुंडे आपको कितना भी डराने की कोशिश करें, आपको कानून पर भरोसा रखना चाहिए। मुझे निर्वाचन आयोग पर पूरा भरोसा है। चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त होंगे।’’

भाषा अमित सुभाष

सुभाष