मालवीय नगर अग्निकांड ने उजागर की सुरक्षा में लापरवाही की पुरानी कहानी

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मालवीय नगर अग्निकांड ने उजागर की सुरक्षा में लापरवाही की पुरानी कहानी

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  • Publish Date - June 3, 2026 / 09:00 PM IST,
    Updated On - June 3, 2026 / 09:00 PM IST

नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) साल 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड में 59 मासूम जिंदगियों के खत्म होने से लेकर, 2019 में अनाज मंडी में 43 और 2022 में मुंडका त्रासदी में 27 लोगों की मौत तक… दिल्ली में विनाशकारी आग का इतिहास लापरवाही, सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और चेतावनियों को नजरअंदाज करने के उदाहरण से भरा है।

मालवीय नगर के एक होटल में बुधवार को लगी भीषण आग ने इस दर्दनाक इतिहास में एक और काला पन्ना जोड़ दिया, जिसमें 21 लोगों की जान चली गई।

दिल्ली के इतिहास में सबसे दर्दनाक याद 1997 का उपहार सिनेमा अग्निकांड है, जब ग्रीन पार्क इलाके में फिल्म ‘बॉर्डर’ के प्रदर्शन के दौरान ट्रांसफार्मर में खराबी के कारण लगी आग ने 59 लोगों की जान ले ली थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। बाद में हुई जांच में आपातकालीन निकास द्वार बंद होने जैसी गंभीर लापरवाही सामने आई थी।

इसके दो दशक से भी अधिक समय बाद, दिसंबर 2019 में एक बार फिर वैसा ही मंजर दिखा जब भीड़भाड़ वाले अनाज मंडी इलाके में एक अवैध फैक्ट्री में आग लग गई। इस हादसे में वहां सो रहे 43 मजदूरों की मौत हो गई थी। इस इमारत में न तो अग्नि सुरक्षा अनुमति थी और न ही आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था थी। संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियों को पहुंचने में देरी हुई और दम घुटने से कई मजदूरों की मौत हो गई।

साल 2011 में नंद नगरी के एक धार्मिक समागम में लगी आग में 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि जनवरी 2018 में बवाना की एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में 17 लोगों की जान चली गई।

इसके एक साल बाद, 2019 में करोल बाग के एक होटल में अवैध रूप से बनी रसोई के कारण लगी आग में 17 मेहमानों की मौत हो गई थी।

मई 2022 में मुंडका की एक व्यावसायिक इमारत में लगी आग ने 27 लोगों की जान ले ली, जिसने एक बार फिर अग्निशमन सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ने की बात साबित की।

साल 2024 में विवेक विहार के एक शिशु देखभाल केंद्र में ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से लगी आग में सात नवजात बच्चों की मौत हो गई थी।

अग्निशमन सुरक्षा विशेषज्ञों और नागरिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि हर बड़े हादसे के बाद जांच बैठती है, मुआवजे की घोषणा होती है और सख्त कार्रवाई के वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती।

रिहायशी इलाकों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियां, इमारत नियमों का उल्लंघन और समय-समय पर निरीक्षण न होना इन हादसों की मुख्य वजह हैं।

दिल्ली दमकल सेवा (डीएफएस) के ताजा आंकड़े भी इस साल शहर में आग लगने की घटनाओं में हुए डरावने इजाफे को दर्शाते हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी में आग की 1,396 घटनाएं हुईं जिनमें छह लोगों की मौत हुई। फरवरी में 1,096 घटनाओं में छह मौतें दर्ज की गईं, जबकि मार्च में आग लगने की 1,538 घटनाओं में सबसे ज्यादा 15 लोगों की जान गई। अप्रैल में दमकल विभाग को आग की 2,663 कॉल मिलीं और पांच मौतें हुईं, जबकि मई में यह आंकड़ा बढ़कर 3,410 कॉल और 12 मौतों तक पहुंच गया।

कुल मिलाकर, इस साल जनवरी से मई के बीच दिल्ली में आग लगने की 10,103 घटनाएं सामने आ चुकी हैं और इनमें 44 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

अब मालवीय नगर का यह होटल भी दिल्ली के सबसे भीषण अग्निकांडों की सूची में शामिल हो गया है, और वही पुराना सवाल बरकरार है कि क्या तेजी से फैलती दिल्ली ने उन हादसों से कोई सबक सीखा है।

भाषा सुमित अविनाश

अविनाश