ममता बनर्जी ने बंगाल में निर्वाचन आयोग के कामकाज पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए सीईसी को लिखा पत्र
ममता बनर्जी ने बंगाल में निर्वाचन आयोग के कामकाज पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए सीईसी को लिखा पत्र
(फाइल फोटो के साथ)
कोलकाता, 19 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले शीर्ष नौकरशाहों और आईपीएस अधिकारियों के रातोंरात तबादला किये जाने को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधने के कुछ घंटों बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आयोग के कामकाज पर ‘गहरा आश्चर्य’ व्यक्त किया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कड़े शब्दों में लिखे अपने आठवें पत्र में बनर्जी ने आरोप लगाया कि आयोग ‘शिष्टाचार और संवैधानिक मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ गया है।’
मुख्यमंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही निर्वाचन आयोग पर ‘स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण’ रवैया अपनाने और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
उन्होंने लिखा, ‘‘निर्वाचन आयोग के कामकाज से मैं स्तब्ध हूं, जो मेरे हिसाब से शालीनता और संवैधानिक औचित्य की सभी सीमाओं को पार कर गया है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है और जमीनी हकीकत या जनता के कल्याण की जरा भी परवाह नहीं की है।’’
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय से संपर्क करने के कदम का भी जिक्र किया और कहा कि अदालत ने चिंताओं को स्वीकार किया है और निर्देश जारी किए हैं जिन्हें वर्तमान में लागू किया जा रहा है।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कई जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों समेत कई वरिष्ठ राज्य अधिकारियों का ‘‘एकतरफा’’ तबादला कर दिया था।
उन्होंने कहा, “चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद, बिना किसी ठोस कारण के और चुनावी नियमों या आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के किसी भी आरोप के बगैर ही बड़े पैमाने पर ये तबादले किए गए हैं।”
उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची के मौजूदा पुनरीक्षण के दौरान जिला चुनाव अधिकारियों के तबादले “स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रेरित” प्रतीत होते हैं, जिससे लंबित मामलों के निपटारे को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।
चुनाव वाले अन्य राज्यों में राज्य पुलिस अधिकारियों को पर्यवेक्षकों के रूप में तैनात करने पर सवाल उठाते हुए, बनर्जी ने इस कदम को ‘मनमाना’ और ‘अधिकार का दुरुपयोग’ करार दिया एवं आरोप लगाया कि यह आयोग द्वारा ‘गंभीर रूप से अधिकार का दुरुपयोग’ दर्शाता है।
निर्वाचन आयोग से अपने फैसलों पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो बनर्जी ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम ‘‘आपातकाल या अप्रत्यक्ष केंद्रीय शासन’’ जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं। उन्होंने ऐसी स्थिति को ‘बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होंगे। वोटों की गिनती चार मई को होगी।
भाषा राजकुमार माधव
माधव

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