इंफाल, 20 अप्रैल (भाषा) मणिपुर सरकार ने विभिन्न विभागों के प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे उन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करें जो पांच दिवसीय बंद के दौरान अधिकृत अवकाश के बिना कार्यालयों से अनुपस्थित रहे।
महिलाओं के समूहों द्वारा घाटी के जिलों में पांच दिवसीय बंद का आह्वान किया गया था। यह बंद हाल ही में हुए एक बम हमले के विरोध में किया गया था जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई थी।
मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने आदेश दिया था कि विभिन्न समूहों द्वारा व्यवधान या बंद के आह्वान के मद्देनजर सभी प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्ष अपने-अपने कार्यालयों में उपस्थिति सुनिश्चित करें।
रविवार को जारी आदेश में कहा गया है, ‘उपस्थिति रिपोर्ट संबंधित प्रशासनिक विभागों को भेजी जानी चाहिए। बिना अधिकृत अवकाश के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जानी चाहिए।’
सरकार ने सभी उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में सभी कार्यालयों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
यह आदेश घाटी के पांच जिलों में मीरा पैबी समूहों (महिला संगठनों) द्वारा सात अप्रैल को विष्णुपुर के ट्रोंगलाओबी में दो बच्चों की मौत के विरोध में 19 अप्रैल से शुरू हुए पांच दिवसीय बंद के मद्देनजर जारी किया गया था।
इंफाल घाटी के पांच जिलों में इंफाल पूर्व और पश्चिम, विष्णुपुर, काकचिंग और तेंगनुपाल शामिल हैं।
मणिपुर में नगा जनजातियों के सर्वोच्च संगठन, यूनाइटेड नगा काउंसिल ने 18 अप्रैल को उखरुल जिले में घात लगाकर किए गए हमले में दो नागरिकों के मारे जाने के विरोध में सोमवार से सभी नगा-बहुल क्षेत्रों में तीन दिवसीय बंद का आह्वान किया है।
गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने रविवार को ट्रोंगलाओबी बम हमले के विरोध में मीरा पैबी (महिला संगठनों) और अन्य संगठनों द्वारा आयोजित पांच दिवसीय बंद को रद्द करने को कहा था।
उन्होंने कहा, ‘हमने ट्रोंगलाओबी घटना के संबंध में गठित संयुक्त कार्रवाई समिति से बातचीत की है और उनकी मांगों को सुना है।’
उन्होंने कहा, ‘लॉकडाउन की वजह से सभी को परेशानी हो रही है-स्कूल जाने वाले बच्चे, दिहाड़ी मजदूर, किसान और व्यापारी। मैं मीडिया के माध्यम से लॉकडाउन वापस लेने की अपील करना चाहता हूं।’
भाषा तान्या नरेश
नरेश