इंफाल, 18 जून (भाषा) मणिपुर के कांगपोकपी जिले में हाल में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने व्यापक तलाशी अभियान चलाकर हथियार एवं गोला-बारूद बरामद किए हैं। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के एक बयान के अनुसार, बुधवार को लेइलों वैफेई, लेइलों खुनौ, एल. मुनलुई और कोन्साखुल गांवों में तलाशी अभियान चलाया गया, जो लेइमाखोंग पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। इस दौरान कम से कम 30 अवैध बंकर, चौकियां और शिविर भी ध्वस्त कर दिये गए।
एक अधिकारी ने बताया कि लेइलों वैफेई कुकी-जो समुदाय का गांव है, जहां से 13 मई को छह नगा पुरुषों का कथित रूप से अपहरण कर लिया गया था। उनके शव 10 जून को गांव के निकट बरामद किए गए थे।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में लेइलों मुनलुई और कोन्साखुल क्षेत्रों से गोलीबारी की घटनाओं की भी खबरें मिली थीं।
बयान के अनुसार, अभियान के दौरान 11 एकल नली वाली 12 बोर बंदूकें (एसबीबीएल), 12 बोर बंदूक के 294 कारतूस, बारूद के दो पैकेट, 12 बोर बंदूक के कारतूसों के 34 खाली खोखे तथा छह बुलेटप्रूफ जैकेट बरामद किए गए।
पुलिस ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान चार लोगों को सत्यापन के लिए हिरासत में भी लिया गया।
बुधवार को ही चुराचांदपुर जिले के चुराचांदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एस. नाबिल और लोइलामकोई गांवों में एक अवैध जांच चौकी और एक बंकर को भी सुरक्षा बलों ने ध्वस्त कर दिया।
पुलिस ने इससे पहले कहा था कि हाल के सप्ताहों में हत्याओं और विभिन्न समुदायों के बीच सशस्त्र गतिविधियों में बढ़ोतरी को देखते हुए मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) स्वयं अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में नव नियुक्त डीजीपी मुकेश सिंह द्वारा शुरू किए गए सक्रिय सुरक्षा उपायों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि लंबे अंतराल के बाद डीजीपी स्वयं असामाजिक तत्वों के खिलाफ चलाए जा रहे तलाशी अभियानों की निगरानी कर रहे हैं, जो उत्साहजनक है। उन्होंने डीजीपी के सक्रिय दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता की सराहना की।
सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि डीजीपी और सुरक्षा बलों के दृढ़ प्रयासों से मणिपुर में जल्द ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से एकजुट होकर सुरक्षा बलों का सहयोग करने की अपील भी की।
उल्लेखनीय है कि मई 2023 से मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच जारी जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
भाषा मनीषा अमित
अमित