(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली,15 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को यह सूचित किये जाने पर मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई टाल दी कि विभिन्न हिंदू पक्ष इस बात पर आपस में बातचीत कर रहे हैं कि इस मामले में किसका मुकदमा मुख्य मामला होगा।
उच्चतम न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2025 के एक आदेश को चुनौती देने वाले एक हिंदू पक्ष की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। उच्च न्यायालय ने एक अन्य वाद में एक हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना था।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 अगस्त नियत की। ऐसा तब किया गया जब हिंदू पक्षों में से एक के वकील ने बताया कि वादियों के बीच कुछ अनौपचारिक बातचीत चल रही है।
आरंभ में खंडपीठ ने कुछ हिंदू पक्षों की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन तथा इस विवाद में एक अन्य हिंदू पक्ष की ओर से पेश वकील पीवी योगेश्वरन से पूछा कि क्या उनके बीच कोई बातचीत चल रही है।
न्यायमूर्ति कुमार ने कहा, ‘‘अगर दोनों पक्षों के बीच कोई बातचीत चल रही है, तो हम मामले की सुनवाई टाल देंगे।’’
योगेश्वरन ने पीठ से कहा कि वे नहीं चाहते कि अदालत बातचीत के बारे में आदेश में कुछ भी दर्ज करे, क्योंकि यह वादियों के बीच हो रही थी और ‘अनौपचारिक’ है।
न्यायमूर्ति कुमार ने कहा कि मामले को कई बार स्थगित किया जा चुका है और इस बार इसे तभी स्थगित किया जा सकता है जब पक्षों के बीच कोई बात चल रही हो।
पीठ ने वकीलों से कहा, ‘‘हम पक्षों को बातचीत के लिए बाध्य नहीं करने जा रहे हैं। अगर कुछ चल रहा है, तो उसे आदेश में भी दर्ज किया जा सकता है। इसमें क्या हर्ज है? खैर।’’
पीठ ने यह कहते हुए मामले को अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया।
उच्चतम न्यायालय पहले से ही मस्जिद समिति और हिंदू पक्षों की कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इनमें 26 मई 2023 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा मथुरा की अदालत में लंबित विवाद से जुड़े सभी मामलों को अपने पास स्थानांतरित करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका भी शामिल है।
पिछले साल 18 जुलाई को, उच्च न्यायालय ने एक अन्य हिंदू पक्ष को सभी भक्तों का प्रतिनिधि माने जाने की अनुमति दी। इस पक्ष ने मथुरा में विवादित जगह से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की अपील करते हुए एक अलग मुकदमा दायर किया है।
उच्च न्यायालय ने मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मुकदमा नंबर 17/2023 के वादी की उस अर्ज़ी को मंज़ूरी दे दी थी, जिसमें उन्होंने अपने मुक़दमे की अर्ज़ी को इस विवाद से जुड़े बाकी सभी मुक़दमों के लिए ‘प्रतिनिधि मुक़दमा’ मानने का अनुरोध किया था।
इस पर उच्च न्यायालय ने कहा था कि इसके बाद, वाद नंबर 17 को प्रतिनिधि वाद माना जाएगा तथा उसकी सुनवाई और फैसला सबसे पहले किया जाएगा।
इससे पीड़ित हिंदू पक्ष ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया और कहा कि विवाद से जुड़े सभी दिवानी मुकदमों को उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किए जाने के बाद उनके मुकदमे को ‘मुख्य मुकदमा’ माना गया था लेकिन उच्च न्यायालय ने एक दूसरे पक्ष को सभी भक्तों का प्रतिनिधि मानकर गलती की।
न्यायमूर्ति कुमार की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पहले कहा था कि इस मामले की विस्तार से जांच की ज़रूरत है और पक्षों से बहस के लिए तैयारी के साथ आने को कहा था।
यह विवाद शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि इसे मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब ने मथुरा में भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर बने मंदिर को गिराकर बनवाया था।
मथुरा की अदालत में दायर 20 से ज़्यादा दीवानी मुकदमों को उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया था और वे वहां सुनवाई के लिए लंबित हैं।
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश