नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्रालय ने “विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी” के जरिए मानव तस्करी के “खतरनाक चलन” को लेकर चेतावनी दी है।
गृह मंत्रालय ने इसके साथ ही राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसी ठगी से निपटने के लिए “विशेष अभियान का नेतृत्व” करने का निर्देश दिया है जिसके तहत पीड़ितों को ऊंचे वेतन वाली नौकरियों का लालच देकर “साइबर धोखाधड़ी सेंटर” में फंसा लिया जाता है।
मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी परामर्श में राज्य पुलिस, साइबर प्रकोष्ठों, श्रम अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को शामिल करते हुए विशेष प्रवर्तन कार्रवाई की जरूरत बताई है।
राज्य साइबर प्रकोष्ठों को सोशल मीडिया और नौकरी संबंधी पोर्टल पर संदिग्ध भर्ती प्रस्तावों को लेकर सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। परामर्श में कहा गया है कि फर्जी भर्ती के मामलों में प्राधिकारियों को डिजिटल चैट और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड को साक्ष्य के तौर पर तत्काल जब्त करना चाहिए।
स्थानीय भर्ती एजेंसियों के लिए अनिवार्य सत्यापन व्यवस्था स्थापित करने को कहते हुए मंत्रालय ने कहा कि विदेश मंत्रालय के अधीन प्रवासी संरक्षक से वैध लाइसेंस के बिना काम करने वाली एजेंसियों या अवैध मार्गों की सुविधा देने वाली एजेंसियों को बंद करके उनके संचालकों के खिलाफ मानव तस्करी से संबंधित कड़े प्रावधानों के तहत मामला चलाया जाना चाहिए।
मंत्रालय ने कहा, “राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को श्रम भर्ती एजेंसियों, प्लेसमेंट एजेंसी, ठेकेदारों और विदेश में भर्ती की सुविधा देने वालों से संबंधित सत्यापित जानकारी पुलिस, मानव तस्करी रोधी इकाइयों (एएचटीयू), विशेष शाखाओं, जिला प्रशासन आदि के बीच नियमित रूप से साझा करने और प्रसारित करने के लिए एक व्यवस्थित तंत्र स्थापित करना चाहिए।”
मंत्रालय ने राज्यों से लोगों को अनधिकृत प्रवासन के प्रति सचेत करने के लिए जन जागरूकता अभियानों में ई-माइग्रेट पोर्टल का इस्तेमाल करने तथा अनधिकृत एजेंट की पहचान और उनकी सूचना देने में पंचायतों को शामिल करने का आग्रह किया।
उसने कहा, “राज्यों को डिजिटल मंचों और स्थानीय मीडिया को स्पष्ट परामर्श जारी करना चाहिए कि वे विज्ञापन प्रकाशित करने से पहले भर्ती एजेंट के लाइसेंस का सत्यापन करें। उचित जांच-पड़ताल करने में विफलता को अपराध में सहायता और उकसावे के रूप में देखा जाना चाहिए।”
मंत्रालय ने राज्यों से अपनी मानव तस्करी रोधी इकाइयों को मजबूत करने को कहा है। उसने कहा कि निर्भया कोष के तहत केंद्र की सहायता से वित्त पोषित इकाइयों में पर्याप्त कर्मचारी होने चाहिए और उन्हें क्षेत्रीय अभियानों में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए।
मंत्रालय ने राज्यों से बचाए गए लोगों और अज्ञात नाबालिगों का मिशन वात्सल्य पोर्टल के साथ मिलान करने के लिए राष्ट्रीय स्वचालित चेहरा पहचान प्रणाली का इस्तेमाल करने को भी कहा है।
मंत्रालय ने सरकारी कर्मचारियों को चेतावनी दी कि “मिलीभगत और प्रशासनिक लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी’’ और कहा कि निर्धारित प्रक्रियाओं और कार्रवाई का पालन नहीं करने पर विभागीय जांच और अनुशासनात्मक दंड का सामना करना पड़ेगा।
भाषा अमित नरेश
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