नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) पश्चिम एशिया में बढ़ता संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर इसका प्रभाव इस सप्ताह भारत में आयोजित होने वाली ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में प्रमुख चर्चा का विषय रहने की उम्मीद है।
तेहरान ने नयी दिल्ली को सूचित किया है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची 14-15 मई को होने वाली बैठक में शामिल होंगे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र में स्थिति में परिवर्तन होने पर उनकी योजना बदल सकती है।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी इस बैठक में शामिल नहीं होंगे क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा ब्रिक्स बैठक के समय से मेल खाती है और वांग की बीजिंग में उपस्थिति आवश्यक है।
बीजिंग ने मंगलवार को घोषणा की कि भारत में चीनी राजदूत शी फीहोंग विदेश मंत्री वांग की ओर से बैठक में शामिल होंगे।
सूत्रों के अनुसार, रूस के सर्गेई लावरोव सहित कई ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने पहले ही अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है।
ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।
भारत, ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए, सितंबर में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों के इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विदेश मंत्रियों का यह सम्मेलन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर सर्वसम्मति वाला कोई बयान जारी कर पाता है।
पिछले महीने ब्रिक्स के उप विदेश मंत्रियों और पश्चिम एशिया एवं उत्तरी अमेरिका मामलों के विशेष दूतों की बैठक के दौरान, ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर सदस्य देशों के बीच तीखे मतभेदों के कारण भारत द्वारा संघर्ष पर सर्वसम्मति बनाने के प्रयास विफल रहे।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान के बीच मतभेदों के कारण संघर्ष पर कोई सर्वसम्मति वाला बयान जारी नहीं हो सका। हाल के हफ्तों में, दोनों पड़ोसी देशों के बीच यूएई में ऊर्जा अवसंरचना पर ईरान के कथित हमलों को लेकर तीखी बहस हुई है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद, ईरान ने ब्रिक्स के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में भारत से आग्रह किया कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल की शत्रुता को रोकने के लिए अपनी ‘स्वतंत्र भूमिका’ का उपयोग करे।
ब्रिक्स बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बताया, “ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधिमंडल प्रमुख बैठक में भाग लेंगे। वे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।”
मंत्रालय ने कहा कि विदेश मंत्री “आपसी हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों” पर विचार-विमर्श करेंगे।
ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देश 15 मई को “ब्रिक्स 20: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” विषय पर एक सत्र में भाग लेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद “वैश्विक शासन और बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार” पर एक सत्र होगा।
ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों ने अपनी पिछली बैठक पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए 80) के 80वें सत्र के दौरान की थी।
वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स की भावी अध्यक्षता के रूप में भारत ने उस बैठक की अध्यक्षता की थी।
भाषा अमित माधव
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