जमशेदपुर (झारखंड), तीन अक्टूबर (भाषा) नियोक्ताओं द्वारा प्रताड़ना के शिकार हुए झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के सभी 13 प्रवासी श्रमिक राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद शुक्रवार को सुरक्षित घर लौट आए। श्रम विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
आरोप है कि गुजरात के मोरबी जिले में स्थित कंपनी ने इन श्रमिकों को भोजन और अन्य सुविधाएं देने से इनकार कर दिया तथा जब वे घर जाना चाहते थे तो उन्हें वेतन भी नहीं दिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि बहरागोड़ा प्रखंड के मटिहाना पंचायत के मजदूर शुक्रवार दोपहर घर पहुंचे।
प्रवासी नियंत्रण प्रकोष्ठ की टीम लीडर शिखा लाकड़ा ने बताया, ‘प्रवासी श्रमिक शुक्रवार सुबह गुजरात से ट्रेन द्वारा टाटानगर स्टेशन पहुंचने के बाद बस से अपने गृहनगर पहुंचे। हमने मोरबी ज़िला प्रशासन की मदद से यह सुनिश्चित किया कि 13 मज़दूरों का बकाया-लगभग 68,000 रुपये उन्हें दिया जाए।’
यह प्रकोष्ठ झारखंड सरकार के श्रम विभाग के अधीन कार्य करता है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेता कुणाल सारंगी ने ‘एक्स’ पर श्रमिकों के परिवारों की दुर्दशा साझा की थी जिसके बाद सोमवार को श्रम विभाग और पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने प्रवासी श्रमिकों से संपर्क किया। उन्होंने श्रमिकों की सुरक्षित वापसी के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप करने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग और पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को मामले की जांच करने का निर्देश दिया।
सारंगी ने पूर्व में ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था, ‘प्रवासी श्रमिकों के परिवार सोमवार को मुझसे मिले और अपनी समस्या बताई। उनमें ज़्यादातर बहरागोड़ा प्रखंड के आदिवासी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रमिकों को भोजन और अन्य सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं, और जब वे घर जाना चाहते हैं तो उन्हें वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। परिजनों ने इस संबंध में बहरागोड़ा थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है।’
भाषा आशीष पवनेश
पवनेश