मोबाइल गायब होने से आरोपी को मुकदमे से छूट नहीं मिल सकती: अदालत

मोबाइल गायब होने से आरोपी को मुकदमे से छूट नहीं मिल सकती: अदालत

मोबाइल गायब होने से आरोपी को मुकदमे से छूट नहीं मिल सकती: अदालत
Modified Date: July 30, 2026 / 07:24 pm IST
Published Date: July 30, 2026 7:24 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री फेसबुक पर अपलोड करने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन की बरामदगी नहीं होना, अभियोजन को रोकने का आधार नहीं हो सकता, जब डिजिटल साक्ष्य आरोपी को उस खाते से जोड़ते हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरविंदर सिंह जग्गी आरोपी आदित्य बिस्वास की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। बिस्वास ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67बी के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था।

यह धारा बच्चों से जुड़ी यौन रूप से स्पष्ट सामग्री को प्रकाशित करने या प्रसारित करने से संबंधित है।

अदालत ने 27 जुलाई के अपने आदेश में कहा, ‘‘आरोप तय करने के लिए मोबाइल फोन की भौतिक बरामदगी अनिवार्य शर्त नहीं है, जब डिजिटल साक्ष्य, खासकर आईपी लॉग और सब्सक्राइबर डेटा, आरोपी के नियंत्रण वाले सोशल मीडिया खाते से सामग्री प्रसारित किए जाने को स्पष्ट रूप से जोड़ते हैं।’’

यह मामला दिसंबर 2022 में दक्षिण दिल्ली साइबर पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। यह प्राथमिकी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) से मिली शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी, जो अमेरिका स्थित ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन’ (एनसीएमईसी) की ओर से तैयार की गई साइबरटिपलाइन रिपोर्ट पर आधारित थी।

अभियोजन के अनुसार, ‘नीम बिस्वास’ नाम के एक फेसबुक खाते से 17 सेकंड का एक वीडियो अपलोड किया गया था, जिसमें एक बच्चे को यौन रूप से अश्लील हरकत करते हुए दिखाया गया था।

जांचकर्ताओं ने आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर के जरिये इस अकाउंट का पता लगाया और आरोप लगाया कि बिस्वास ने अपने एक दोस्त के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर यह खाता बनाया और संचालित किया था।

आरोपी ने आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देते हुए दलील दी कि फेसबुक या एनसीएमईसी के किसी अधिकारी से पूछताछ नहीं की गई है। इसलिए साइबरटिपलाइन रिपोर्ट को सुनी-सुनाई जानकारी माना जाना चाहिए।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


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