रास : कांग्रेस के मुकुल वासनिक ने सामाजिक न्याय पर वार्षिक रिपोर्ट लाने की मांग की

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रास : कांग्रेस के मुकुल वासनिक ने सामाजिक न्याय पर वार्षिक रिपोर्ट लाने की मांग की

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  • Publish Date - February 10, 2026 / 02:05 PM IST,
    Updated On - February 10, 2026 / 02:05 PM IST

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्य मुकुल बालकृष्ण वासनिक ने मंगलवार को सरकार से सामाजिक न्याय पर वार्षिक रिपोर्ट लाने और आर्थिक समीक्षा की तरह ही उसे भी संसद में पेश करने की मांग की।

सरकार आम बजट से पहले संसद में आर्थिक समीक्षा पेश करती है।

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए वासनिक ने कहा कि भारत को सामाजिक न्याय की स्थिति पर एक वार्षिक रिपोर्ट को संस्थागत रूप देना चाहिए और उसे आर्थिक सर्वेक्षण या समीक्षा की तरह संसद में रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट ऐसी होनी चाहिए जो समानता और समावेश के संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए आंकड़ों पर आधारित एक रणनीतिक मार्गदर्शक के रूप में काम करे और संसद के भीतर और बाहर चर्चा के लिए उपलब्ध हो।”

वासनिक ने कहा कि सामाजिक न्याय पर यह रिपोर्ट मौजूदा कानूनी और नीतिगत ढांचे का व्यवस्थित रूप से मूल्यांकन करे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हैं।

उन्होंने कहा कि इसमें सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि वंचित वर्गों के लोगों के जीवन और गरिमा की रक्षा के लिए मौजूद विभिन्न योजनाओं और कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा की जा सके।

वासनिक ने कहा, “अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों के साथ-साथ भीड़ द्वारा लोगों की जान लेने (लिंचिंग) की घटनाओं में वृद्धि पर, इस रिपोर्ट में विशेष ध्यान देना चाहिए। कब तक हम लोग अमानवीय परिस्थितियों में नालों या गटर या मेनहोल में उतरकर नालियों की सफाई करने और इस प्रक्रिया में कुछ के मारे जाने के साक्षी बनते रहेंगे? राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में इसके समाधान की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में बजटीय आवंटन और जमीनी स्तर पर उनके प्रभाव तथा वंचित वर्गों के सशक्तीकरण की योजनाओं का भी विश्लेषण होना चाहिए।

वासनिक ने कहा कि इसमें विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच शिक्षा, रोजगार, औसत आय और गरीबी के स्तर में मौजूद असमानताओं का आकलन करते हुए सामाजिक-आर्थिक अंतर पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “आरक्षित श्रेणियों में नियुक्तियों को लेकर अब भी इतना बड़ा बैकलॉग क्यों है और इसे दूर करने के लिए क्या किया जाना चाहिए? वंचित वर्गों से आने वाले बच्चों के शैक्षणिक स्तर में आज भी इतना बड़ा अंतर क्यों है?”

शून्यकाल में ही द्रमुक सदस्य केआरएन राजेश कुमार ने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) को कर छूट देने और अधिक समर्थन उपलब्ध कराने की मांग की।

उन्होंने कहा कि नाबार्ड भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और कृषि, ऋण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास तथा देशभर में आय को बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका है।

द्रमुक सांसद ने कहा कि जिस वित्तीय ढांचे के तहत नाबार्ड काम करता है, वह उसकी भूमिका निभाने की क्षमता को गंभीर रूप से सीमित करता है।

कुमार ने कहा कि नाबार्ड पर आयकर लगाए जाने से उसकी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और संसाधनों की निकासी होती है। उन्होंने कहा, “मैं सरकार से नाबार्ड पर लगाए गए आयकर को हटाने का अनुरोध करता हूं।”

उन्होंने यह भी कहा कि नाबार्ड को अपने उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए अधिक बजटीय समर्थन, अधिक स्वायत्तता के साथ-साथ उसमें प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन में अधिक निवेश की आवश्यकता है।

भाषा मनीषा वैभव

वैभव