तिरूवनंतपुरम, 26 मई (भाषा) केरल राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के.एस. हमजा ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि केंद्र के ‘उम्मीद’ पोर्टल पर विवादित मुनंबम भूमि का पंजीकरण केवल एक तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है तथा इससे संपत्ति का अंतिम स्वामित्व निर्धारित नहीं होगा।
हमजा ने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पंजीकरण एक अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया और दायित्व के हिस्से के रूप में किया गया जिसे 17 मई से पहले पूरा करना था और उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वामित्व के संबंध में कोई भी अंतिम निर्णय सरकार और अदालत के फैसलों के अधीन होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘भले ही कोई संपत्ति ‘उम्मीद’ पोर्टल पर पंजीकृत हो, स्वामित्व अधिकार का निर्धारण केवल सरकार और अदालतों के अंतिम निर्णय के अनुसार ही होगा।’’
हमजा ने कहा कि वक्फ बोर्ड का मुनंबम के निवासियों के प्रति कोई द्वेष नहीं है और वह उनके प्रति सहानुभूति रखता है।
उन्होंने कहा, ‘‘देश में कई तकनीकी जटिलताएं मौजूद हैं, और ऐसे मुद्दों को कानूनी माध्यमों से हल किया जाना चाहिए।’’
हमजा ने मुनंबम के भूस्वामियों के साथ ‘‘धोखाधड़ी’’ का आरोप लगाते हुए दावा किया कि एक वकील और फारूक कॉलेज के प्रबंधन सहित कुछ व्यक्तियों ने निवासियों को गुमराह करके ऐसी जमीन खरीदवाई, जिन पर कथित तौर पर वैध बिक्री अधिकार नहीं थे।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘उन्हें यह कहकर फंसाया गया कि जमीन को बेचने का अधिकार है, जबकि वक्फ प्रावधानों के तहत उस पर स्वामित्व हस्तांतरण का कोई अधिकार नहीं था।’’
हमजा ने दावा किया कि मुनंबम की जमीन को 2019 में यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) समर्थित वक्फ बोर्ड के कार्यकाल के दौरान वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत किया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘केरल में लगभग 59,000 वक्फ संपत्तियां उम्मीद पोर्टल पर पंजीकृत हैं। मुनंबम भी उनमें से एक है। लेकिन यह अंतिम दस्तावेज नहीं है तथा सरकार और अदालतों द्वारा लिए गए सभी निर्णयों के अधीन है।’’
साथ ही, उन्होंने कहा कि निवासियों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें संपत्तियां खरीदने से पहले मूल भूमि दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए थी।
ये टिप्पणियां मुनंबम भूमि विवाद को लेकर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच आई हैं, क्योंकि हमजा ने पहले कहा था कि विवादित भूमि वक्फ संपत्ति है और इसे राज्य में अन्य वक्फ संपत्तियों के साथ उम्मीद पोर्टल में शामिल किया गया है।
इस मुद्दे के चलते मुनंबम के निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने सोमवार को आश्वासन दिया कि प्रभावित निवासियों को उनके घरों से बेदखल नहीं किया जाएगा।
सतीशन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने फैसला किया है कि इन पीड़ितों को उनके घरों से बेदखल नहीं किया जाएगा। उनकी रक्षा की जाएगी। उन्हें उनकी जमीन मिलेगी। हम इसके लिए अंत तक लड़ेंगे।’’
मुनंबम विवाद केरल में राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा है, जिसमें कई निवासियों ने अपनी जमीन के स्वामित्व की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है।
भाजपा ने प्रदर्शनकारी निवासियों को समर्थन दिया है और दावा किया है कि संशोधित वक्फ अधिनियम उनकी चिंताओं को दूर करने में मदद करेगा।
चर्च द्वारा संचालित मलयालम दैनिक ‘दीपिका’ ने सोमवार को प्रकाशित एक संपादकीय में विवादित भूमि को उम्मीद पोर्टल पर पंजीकृत करने के लिए केरल राज्य वक्फ बोर्ड की कड़ी आलोचना की और अधिसूचना को वापस लेने की मांग की।
अखबार ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया और सतीशन के पूर्व के उस दावे को याद दिलाया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो मुनंबम मुद्दे को ‘‘10 मिनट’’ के भीतर हल किया जा सकता है।
भाषा सुभाष नरेश
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