कोच्चि, 26 अप्रैल (भाषा) केरल में त्रिशूर जिले के मुंडाथिकोड स्थित पटाखा निर्माण इकाई में हुए विस्फोट की जांच कर रहे न्यायिक आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी. एन. रामचंद्रन ने रविवार को कहा कि सुरक्षा बढ़ाने और ऐसे हादसों की गंभीरता कम करने के लिए आतिशबाजी के तरीकों में बदलाव पर विचार किया जाना चाहिए।
केरल उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रामचंद्रन ने यहां अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जांच के तहत आयोग त्रिशूर जिला पुलिस प्रमुख और जिला कलेक्टर के साथ चर्चा करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा हम घायलों से मिलेंगे और उस स्थान का भी दौरा करेंगे, जहां विस्फोट हुए थे।’’
रामचंद्रन ने कहा कि सरकार आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है, बल्कि उसे अधिक सुरक्षित बनाना चाहती है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि सरकार आतिशबाजी पर रोक लगाना चाहती है, तो वह इसके लिए कानून बना सकती है। हादसों के बाद भी ये कार्यक्रम जारी रहते हैं। इसलिए मुझे राज्य सरकार की ओर से इसे प्रतिबंधित करने की कोई मंशा नजर नहीं आती।’’
उन्होंने कहा कि आतिशबाजी के तरीकों में बदलाव से जोखिम कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘आतिशबाजी के स्वरूप को बदलना होगा। इसे अधिक प्रकाश-आधारित शो बनाया जाए तो हादसों को कम किया जा सकता है। कम से कम ऐसे हादसों की गंभीरता जरूर घटाई जा सकती है।’’
वर्ष 2016 में पुट्टिंगल मंदिर में आतिशबाजी त्रासदी में 110 लोगों की मौत होने के बाद राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति पी. एस. गोपीनाथन की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग गठित किया था, जिसने बाद में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि न्यायमूर्ति गोपीनाथन आयोग की सिफारिशों को अबतक लागू नहीं किया गया है।
मुंडाथिकोड में 21 अप्रैल को त्रिशूर पूरम उत्सव के लिए थिरुवंबाडी देवस्वओम के वास्ते पटाखे तैयार करते समय कई विस्फोट हुए थे।
घटनास्थल पर मौजूद 38 लोगों में से 15 की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग अब भी लापता हैं।
भाषा गोला सुरेश
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