नासिर-जुनैद हत्याकांड: जमानत मिलने के बाद मोनू मानेसर गुरुग्राम स्थित अपने गांव लौटा

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नासिर-जुनैद हत्याकांड: जमानत मिलने के बाद मोनू मानेसर गुरुग्राम स्थित अपने गांव लौटा

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  • Publish Date - March 8, 2026 / 07:11 PM IST,
    Updated On - March 8, 2026 / 07:11 PM IST

गुरुग्राम, आठ मार्च (भाषा) वर्ष 2023 में जुनैद और नासिर हत्याकांड में आरोपी मोनू मानेसर राजस्थान की जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद गुरुग्राम स्थित अपने पैतृक गांव लौट आया है। ग्रामीणों ने ढोल बजाकर और माला पहनाकर उसका स्वागत किया।

एक ग्रामीण ने बताया कि मोनू का स्वागत करने के लिए सैकड़ों लोग राजस्थान आए थे। उसे भरतपुर केंद्रीय जेल, सेवार में रखा गया था और ढाई साल न्यायिक हिरासत में बिताने के बाद शनिवार को जमानत पर रिहा किया गया।

शाम करीब 7.30 बजे मोनू बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर जेल से बाहर निकला और अपने समर्थकों के साथ सड़क मार्ग से मानेसर के लिए रवाना हो गया।

पुलिस ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने पांच मार्च को मानेसर को नियमित जमानत दी थी जिसके बाद शनिवार को कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भारी सुरक्षा के बीच उसे रिहा कर दिया गया।

ग्रामीण ने बताया कि मोनू के गांव पहुंचते ही लोगों ने ढोल बजाकर उसका स्वागत किया, उसे माला पहनाई और गोद में उठाकर घर ले गए। मानेसर में देर रात तक जश्न चलता रहा।

मोनू उर्फ ​​मोहित यादव पर गाय की तस्करी करने के संदेह में जुनैद (35) और उसके चचेरे भाई नासिर (27) की हत्या करने का आरोप है। दोनों चचेरे भाइयों के शव 16 फरवरी, 2023 को हरियाणा के भिवानी जिले में एक जले हुए वाहन के अंदर पाए गए थे।

इसके बाद उनके परिवारों ने मोनू समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। जिसके बाद करीब दो साल पहले राजस्थान पुलिस ने बजरंग दल कार्यकर्ता को मानेसर से गिरफ्तार कर लिया।

12 अगस्त 2023 को मोनू को पटौदी गोलीबारी कांड के सिलसिले में गुरुग्राम पुलिस ने भी गिरफ्तार कर लिया। नूह दंगों के दौरान भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने के आरोप में भी उसे गिरफ्तार किया गया था।

गुरुग्राम की अदालत ने दोनों मामलों में उसे जमानत दे दी, लेकिन गिरफ्तारी के दौरान राजस्थान पुलिस ने अदालत से ट्रांजिट रिमांड हासिल कर ली और दावा किया कि वह नासिर-जुनैद हत्याकांड में मुख्य आरोपी है।

बाद में उसे राजस्थान की अदालत में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। तब से वह भरतपुर की केंद्रीय जेल में बंद था।

भाषा संतोष नरेश

नरेश