नेशनल हेराल्ड मामला: सोनिया, राहुल ने ईडी की याचिका को ‘कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग’ बताया

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नेशनल हेराल्ड मामला: सोनिया, राहुल ने ईडी की याचिका को ‘कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग’ बताया

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 09:33 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 09:33 PM IST

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े धन शोधन मामले में उनके खिलाफ आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इनकार करने वाले निचली अदालत के आदेश के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर याचिका को “कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग” करार दिया है।

गांधी परिवार ने अपने जवाब में ईडी की पुनरीक्षण याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह “विचारणीय नहीं है” क्योंकि अधीनस्थ अदालत का आदेश “पूरी तरह कानूनी और विधि सम्मत है और इसमें किसी भी क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि, विकृति, अनियमितता या अवैधता का कोई दोष नहीं है”।

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता को मंगलवार को गांधी परिवार के वकील ने सूचित किया कि उन्होंने 18 सितंबर को जवाब दाखिल कर दिए हैं। अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया।

अधिवक्ताओं सुशील बजाज, तरन्नुम चीमा और कनिष्का सिंह के माध्यम से दायर जवाबों में कहा गया, “याचिकाकर्ता (ईडी) यह प्रदर्शित करने में बुरी तरह विफल रहा है कि उसके द्वारा दायर शिकायत मामले पर लागू वैधानिक प्रावधानों के आधार पर विचारणीय थी। यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि ‘निजी शिकायत’ या ‘किसी सार्वजनिक व्यक्ति/नागरिक द्वारा शिकायत’ जैसे शब्दों का पूरे वैधानिक ढांचे में कहीं भी कोई स्थान नहीं है।”

अधीनस्थ अदालत ने 16 दिसंबर, 2025 को माना था कि मामले में एजेंसी की शिकायत का संज्ञान लेना “कानूनन अस्वीकार्य” था क्योंकि यह किसी प्राथमिकी पर आधारित नहीं थी।

अपने आदेश में, अदालत ने कहा था कि धन शोधन के अपराध से संबंधित जांच और उसके परिणामस्वरूप दायर अभियोजन शिकायत (आरोपपत्र के समकक्ष) पीएमएलए की अनुसूची में उल्लिखित अपराध के लिए प्राथमिकी के अभाव में “विचारणीय नहीं” थी।

ईडी ने उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में दावा किया कि अधीनस्थ अदालत के आदेश ने प्रभावी रूप से धन शोधन करने वालों की एक श्रेणी को केवल इस आधार पर खुली छूट दे दी है कि अनुसूचित अपराध की सूचना किसी व्यक्ति द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत के माध्यम से दी गई है।

ईडी की याचिका का विरोध करते हुए गांधी की तरफ से कहा गया कि यह मामला एकमात्र ऐसा उदाहरण है जहां किसी व्यक्ति की गैर-सांविधिक शिकायत को पीएमएलए के तहत कार्यवाही शुरू करने का आधार बनाया गया है।

भाषा प्रशांत अविनाश

अविनाश