नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय नौसेना का शीर्ष नेतृत्व 29 सितंबर से शुरू हो रहे तीन दिवसीय द्विवार्षिक सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा सहित भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने में अपने योगदान और अपनी अभियानगत तैयारियों की व्यापक समीक्षा करेगा। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
नौसेना के शीर्ष स्तर के कमांडर सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल एन.एस. राजासुब्रमणि और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन शामिल होंगे। सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ भी सम्मेलन में प्रतिभागियों से संवाद करेंगे।
नौसेना का यह द्विवार्षिक सम्मेलन 29 सितंबर से एक अक्टूबर तक यहां नौसेना भवन में आयोजित किया जाएगा।
नौसेना के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘नौसेना के शीर्ष स्तर के मंच के रूप में यह सम्मेलन देश के विभिन्न हिस्सों में तैनात संचालन और क्षेत्रीय कमांडर सहित नौसेना के शीर्ष नेतृत्व को सैन्य-रणनीतिक स्तर पर अभियानगत तैयारियों की व्यापक समीक्षा करने तथा एक संस्थागत तंत्र के माध्यम से वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।’’
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के बीच ‘‘ऊर्जा सुरक्षा’’ सहित भारत के समुद्री हितों की रक्षा में नौसेना के योगदान को रेखांकित करने में ‘‘महत्वपूर्ण’’ भूमिका निभाएगा।
नौसेना ने कहा कि उसके द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ का दृढ़ संचालन और एक विश्वसनीय समुद्री बल के रूप में उसका उभरना, हिंद महासागर क्षेत्र और उससे परे ‘‘पसंदीदा सुरक्षा भागीदार’’ के रूप में उसकी स्थिति को और मजबूत करता है।
सम्मेलन के पहले दिन रक्षा मंत्री सिंह राष्ट्रीय समुद्री दृष्टिकोण और भारतीय नौसेना से अपेक्षाओं को लेकर अपनी सोच और मार्गदर्शन साझा करेंगे।
अधिकारी ने बताया कि प्रमुख रक्षा अध्यक्ष और सेनाध्यक्ष भी नौसेना के कमांडरों के साथ संवाद करेंगे, ताकि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और एकीकरण को बढ़ावा दिया जा सके।
भाषा खारी नरेश
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